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Mamta Kulkarni News: ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनने पर विवाद

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ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर की पदवी देने और पद से हटाने को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. कई संत ममता के सपोर्ट में हैं, तो कई विरोध कर रहे हैं. इस बीच, ममता ने उनकी आलोचना करने वालों को जवाब दे रही हैं. साथ …और पढ़ें

'मेरा यही संकल्प...' महामंडलेश्वर की पदवी से हटते ही ममता के फिर बदले बोल

ममता कुलकर्णी ने 23 साल तपस्या की है. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

मुंबई. Mamta Kulkarni News: ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर की पदवी देने और उन्हें हटाने को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. पहले, ममता को जूना अखाड़े से जुड़े किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनने का कई संतों ने विरोध किया, जिसमें बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री और बाबा रामदेव भी शामिल रहे थे. ममता ने इन सभी को करारा जवाब दिया और कहा कि उन्होंने साध्वी बनने के लिए 23 साल तपस्या की है. उन्होंने बताया इस राह पर चलने के कई अलग-अलग कारण बताए, जिनमें विरोधाभास देखने को मिला.

दरअसल, ममता कुलकर्णी हाल में इंडिया टीवी के शो ‘आप की अदालत’ में आई थीं, जहां उन्होंने अपनी पर्सनल, प्रोफेशनल और साध्वी बनने की राह तय करने के बारे में बताया. ममता ने बताया कि वह इतने साल तक भारत में क्यों नहीं आई. उन्होंने साध्वी बनने का फैसला क्यों किया? उन्होंने कहा,”मैंने 23 साल भारत में पैर नहीं रखा.”

ममता कुलकर्णी ने आगे कहा,”क्योंकि मैंने संकल्प शक्ति ली थी कि जो भी आरोप मुझ पर लगे हैं, उन सबसे पहले कोर्ट से क्लीन चिट मिलनी चाहिए.” उन्होंने कहा कि पब्लिसिटी के लिए उनका ड्रग केस में डाल दिया. ममता ने कहा,”आप सब जानते हैं कि किस ऑफिसर ने मेरा नाम लिया था, उसको मुंबई का कमिश्नर बनना था. उसी ने ही मेरा नाम लिया.”

ममता कुलकर्णी ने आगे कहा, “सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने वो केस तो खारिज कर दिया. मेरा यही संकल्प था कि जब तक केस खत्म नहीं होता, तब तक मैं भारत में पैर नहीं रखूंगी.” हालांकि बाद में ममता ने कहा कि बॉलीवुड से उनका भ्रम टूट गया था. 2001 में ही उनकी मां का निधन हो गया था. वह बुरी तरह टूट गई थीं. इसलिए उन्होंने इस राह पर चलने का फैसला किया.

हालांकि, इससे पहले आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में ममता कुलकर्णी ने भारत छोड़ने की वजह आध्यात्म को बताया था. उनका कहना था कि साल 1996 में उनका इंटरेस्ट स्प्रिचुएलिटी की तरफ हुआ और इसी दौरान उनकी मुलाकात गुरु गगन गिरी महाराज से हुई. फिर उन्होंने आधात्यम पढ़ा-तपस्या शुरू की. साल 2000 से 2012 तक उन्होंने तपस्या की थी.

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‘मेरा यही संकल्प…’ महामंडलेश्वर की पदवी से हटते ही ममता के फिर बदले बोल

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