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ये कैसी परंपरा! MP के बुरहानपुर में एक ऐसा समाज, जहां साल में 1 दिन पुरुष पहनते हैं साड़ी, जानें दिलचस्प कहानी

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Agency:News18 Madhya Pradesh

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Burhanpur News: बुरहानपुर के इस समाज में एक अनोखी परंपरा है, जिसमें पुरुष हर साल बसंत पंचमी के अवसर पर साड़ी पहनते हैं और मुझे महाराज की शोभायात्रा में भाग लेते हैं.

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साड़ी

साड़ी पहन कर शोभायात्रा में शामिल हुए पुरुष 

हाइलाइट्स

  • बुरहानपुर में माली समाज की अनोखी परंपरा है।
  • पुरुष बसंत पंचमी पर साड़ी पहनते हैं।
  • मुझे महाराज की शोभायात्रा और स्नान होता है।

बुरहानपुर. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के रास्तीपुरा क्षेत्र में माली समाज निवास करता है. यहां पर इस समाज की वर्षों पुरानी परंपरा चली आ रही है. समाज के सुधाकर महाजन का कहना है कि यहां करीब 100 सालों से हम इस परंपरा का पालन कर रहे हैं. हमारे पूर्वज भी इस परंपरा का पालन करते थे. हमारे यहां साल में एक दिन पुरुष साड़ी पहनते हैं और मुझे महाराज के मेले में शामिल होते हैं. मुझे महाराज की शोभायात्रा भी निकाली जाती है और ताप्ती नदी पर स्नान किया जाता है. इसके बाद सभी लोग अपने-अपने घर पर रिश्तेदारों और कुटुंब के लोगों को बुलाकर भोजन करवाते हैं. यह आयोजन बसंत पंचमी के अवसर पर होता है, जिसमें जिले के साथ-साथ महाराष्ट्र के लोग भी शामिल होते हैं.

समाज जनों ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम ने जब समाज के सुधाकर महाजन से बात की तो उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी के अवसर पर मुझे महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है. माली समाज आज भी पुरानी संस्कृति का पालन कर रहा है. पुराने जमाने में जिस तरह से मुझे महाराज के कपड़े बनाए जाते थे, उसी तरह से आज भी हमारे समाज के पुरुषों को साल में एक दिन साड़ी पहनाई जाती है और ऊपर से रुमाल बांधा जाता है. मुझे महाराज गाजे-बाजे की धुन पर नाचते-गाते हुए ताप्ती नदी के राजघाट पर पहुंचते हैं. वहां उनका स्नान करवाया जाता है. स्नान के बाद उनकी पूजा-अर्चना होती है और फिर कुटुंब के लोगों को भोजन कराया जाता है. यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और हमारी तीसरी पीढ़ी करीब 100 वर्षों से इस परंपरा का पालन कर रही है.

चांदी के बनाए जाते हैं मुझे महाराज
समाज के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि समाज में चांदी के मुझे महाराज बनाए जाते हैं. लोग अपने कुल देवता के स्थान से सोनार के यहां जाते हैं और वहां से मुझे महाराज लेकर ताप्ती नदी में स्नान करवाते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. यह परंपरा करीब 500 वर्षों से चली आ रही है. इस आयोजन में जिले के साथ-साथ महाराष्ट्र के समाजजन भी शामिल होते हैं.

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MP के बुरहानपुर में एक ऐसा समाज, जहां साल में 1 दिन पुरुष पहनते हैं साड़ी

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