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ऐसा नजारा देखा है? जहां तूफान जैसी घोड़ों की रफ्तार, बादलों जैसी जयकारों की गूंज और मस्ती में झूम उठते हैं लोग

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Agency:Local18

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Magh Vari Ringan Utsav: सोलापुर में माघ वारी के अवसर पर माऊली की पालकी का रिंगण उत्सव संपन्न हुआ. 200 साल पुरानी परंपरा में 63 दिंडियों ने भाग लिया. अखिल भारतीय वारकरी मंडल के मार्गदर्शन में यह बारहवां रिंगण उत…और पढ़ें

सैकड़ों भक्त, गूंजते जयकारे और भागते घोड़े! ये रोमांचक उत्सव कहा होता है?

हाइलाइट्स

  • सोलापुर में माघ वारी रिंगण उत्सव संपन्न हुआ.
  • 200 साल पुरानी परंपरा में 63 दिंडियों ने भाग लिया.
  • अखिल भारतीय वारकरी मंडल का बारहवां रिंगण उत्सव था.

सोलापुर: आषाढ़ और कार्तिक महीने में माऊली की पालकी में रिंगण उत्सव होता है. पिछले कुछ समय से माघ पूर्णिमा में भी रिंगण उत्सव की परंपरा शुरू हो गई है. हाल ही में माघ वारी के अवसर पर सोलापुर शहर और जिले से पंढरपुर की ओर जाने वाली सभी दिंडियों का एकत्रित रिंगण उत्सव संपन्न हुआ. सोलापुर नॉर्थकोट मैदान में माऊली के घोड़ेों का गोल रिंगण हुआ. इस समय माऊली ‘माऊली’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा. अखिल भारतीय वारकरी मंडल का यह बारहवां रिंगण उत्सव है.

200 साल की परंपरा
माऊली… माऊली… के जयघोष के साथ गोल रिंगण शुरू हुआ और माऊली की पालकी में दौड़ने वाले दो घोड़े दौड़े. माऊली का जयघोष करते हुए घोड़े के पैरों की मिट्टी माथे पर लगाते हुए ‘धन्य आजी दिन संत दर्शन का’ यह भाव मन में रखते हुए विठूराय को आंखों में भरकर देखने के लिए 63 दिंडियों का पंढरी की ओर प्रस्थान हुआ. माघी दिंडी उत्सव सोलापुर से जाने की परंपरा 200 साल से अधिक पुरानी है. शहर से 38 और ग्रामीण क्षेत्रों से 25 दिंडियों का सहभाग होता है.

कैसा हुआ रिंगण उत्सव?
महिला और पुरुष वारकरी भक्तों ने उत्साह से रिंगण उत्सव में पाऊल, फुगड़ी खेली. उसके बाद गोल रिंगण हुआ. पहला रिंगण ध्वजधारी भक्तों का हुआ. दिंडी की शुरुआत वैष्णव पताका से होती है. तुलसी वृंदावनधारी महिलाओं और मृदंग के रिंगण के बाद वीणेकरी रिंगण हुआ. अंत में घोड़े रिंगण के लिए कर्नाटक राज्य के अंकली गांव से आषाढ़ी वारी के माऊली के घोड़े आए थे. घोड़े रिंगण शुरू हुआ और भक्तों में चैतन्य फैल गया. नॉर्थकोर्ट मैदान पर पूरा वातावरण विठ्ठलमय हो गया था. अखिल भारतीय वारकरी मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ह.भ.प. सुधाकर इंगळे महाराज के मार्गदर्शन में यह उत्सव संपन्न हुआ.

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अगला रिंगण कहां होगा?
माघ वारी का पहला गोल रिंगण उत्सव सोलापुर में हुआ. उसके बाद पंढरी की ओर जाते समय दो मार्ग हैं. एक तिर्हे मार्ग और दूसरा मोहोळ मार्ग से पंढरी की ओर जा सकते हैं. तिर्हे मार्ग से जाते समय 5 फरवरी को सुबह 9 बजे पाटकर वस्ती कुरुल में रिंगण उत्सव होगा. तीसरा गोल रिंगण उत्सव महात्मा गांधी विद्यालय, पेनूर में संपन्न होगा. चौथा गोल रिंगण उत्सव श्री दत्त विद्यालय, सुस्ते, ता. पंढरपुर में होगा. 7 फरवरी को अंतिम उभा गोल रिंगण पंढरपुर में प्रवेश करते समय जलाराम महाराज मठ के सामने होगा.

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