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Agency:News18 Madhya Pradesh
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Ground Report: छतरपुर जिले के मुड़ेरी गांव के लोग पहाड़ को बचाने के लिए एक अद्भुत परंपरा का पालन कर रहे हैं. यह परंपरा गंदगी और अवैध उत्खनन से पहाड़ की रक्षा करती है.
छतरपुर जिले स्थित मुड़ेरी गांव का पहाड़
हाइलाइट्स
- मुड़ेरी गांव में पहाड़ पर राम-राम लिखने की परंपरा है।
- यह परंपरा पहाड़ को गंदगी और अवैध उत्खनन से बचाती है।
- हर साल पहाड़ पर सीताराम, राम-राम लिखा जाता है।
छतरपुर. जिले के मुड़ेरी गांव में एक ऐसा पहाड़ है, जिसे बचाने के लिए गांव वाले सालों से पहाड़ पर राम-राम लिख रहे हैं. दरअसल, ग्रामीणों ने पहाड़ को बचाने के लिए पूरे पहाड़ में सीताराम, राम-राम लिख रखा है. ये नाम बड़े-बड़े अक्षरों से लिखे जाते हैं, जो दूर से ही दिख जाते है. मान्यता है कि इस पहाड़ का पत्थर भी नहीं कोई तोड़ सकता है.
पुजारी रामकरन शुक्ला लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि पहाड़ पर सीताराम लिखने की पहल बहुत सालों पहले शुरू हुई थी. शुरुआत में गांव के लोग इस पहाड़ के इर्द-गिर्द में गंदगी करते थे. पहाड़ की उंचाई पर देवी-देवताओं का मंदिर भी है. इसलिए पहाड़ में सीताराम लिखने की मुहिम शुरू की गई.
नहीं करता कोई पहाड़ से छेड़खानी
पुजारी बताते हैं कि कुछ साल पहले एक बाहरी व्यक्ति ने पहाड़ के 100 पत्थर निकाले थे. पत्थर तोड़ने के दौरान एक छेनी उछलकर उसके सिर में लग गई. आज भी उन पत्थरों में छेद बने हुए हैं. साथ ही पत्थर में छेद बने हुए हैं.
बचपन से देखते आए हैं
सरपंच अवध गर्ग बताते हैं कि हम बचपन से ही देखते आए हैं कि इसमें राम-राम लिखा जाता था. बरसात के दिनों में मिट जाता था तो फिर से दोबारा लिखा जाता था. पहाड़ के चारों तरफ़ बस्ती है. कुछ लोग यहां गंदगी भी करते थे. लोग पहाड़ को स्वच्छ रखें, पेड़ों की कटाई न हो, पशु-पक्षियों को नुकसान न हो, अवैध उत्खनन न हो. इसलिए पहाड़ में सीताराम लिखने की मुहिम शुरू कर दी गई थी.
हर साल लिखते हैं सीताराम
सरपंच बताते हैं कि हर साल ही पहाड़ में राम-राम, सीताराम लिखा जाता है. हर गांव के लोगों को भी अपने पहाड़ की खूबसूरती बचानी चाहिए.
अभिषेक त्रिपाठी बताते हैं कि बचपन से ही सीताराम की मुहिम देख रहा हूं. आसपास के क्षेत्रों में तेज़ी से पहाड़ों का उत्खनन हो रहा है. इसलिए सीताराम लिखा जा रहा है.
Chhatarpur,Madhya Pradesh
February 09, 2025, 14:55 IST
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