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हम भारतीय चलते-फिरते एक-दूसरे को प्यार की झप्पी देते रहते हैं. हालांकि मिसी रॉबिंसन (Missy Robinson) नाम की महिला का पेशा आम लोगों से बिल्कुल अलग है. वो इसी झप्पी से लाखों कमाती है, वो भी घर बैठे-बैठे.
लोगों को गले लगाकर पैसे कमाती है महिला. (Credit- Instagram/missyrobinson)
Woman Charges 8000 Rs for Hug: एक-दूसरे को गले लगाना कुछ सबसे अच्छी भावनाओं और अनुभवों में से एक है. इस छोटे से जेस्चर में काफी सुकून महसूस होता है. कई बार इंसान के बुरे से बुरे मूड को एक अच्छी सी झप्पी ठीक कर देती है. इसी फैक्ट का फायदा उठाते हुए दुनिया में ऐसे कई लोग हैं, जो लोगों को सिर्फ गले लगाकर अच्छा पैसा कमाते हैं. एक ऐसी ही महिला के बारे में हम आपको आज बताएंगे.
हमारे देश में लोग हर चौथी बात पर एक-दूसरे के गले लग जाते हैं. खुशी हो या गम, एक झप्पी हर हालात का इलाज कर देती है. हालांकि मिसी रॉबिंसन (Missy Robinson) नाम की महिला का पेशा आम लोगों से बिल्कुल अलग है. वो इसी झप्पी से लाखों कमाती है, वो भी घर बैठे-बैठे. उसकी नौकरी है प्रोफेशनल कडलर की, जिसमें लोग प्यार और सुकून पाने के लिए पैसे खर्च करते हैं.
झप्पी देकर जेब खाली करती है महिला!
मिसी रॉबिंसन (Missy Robinson) नाम की महिला एक प्रोफेशनल कडलर हैं, जो लोगों को गले लगाकर उन्हें सुकून का एहसास कराती हैं. सोशल मीडिया पर खुद को इंटरनेशनल प्रोफेशनल कडलर बताने वाली मिसी बाकायदा टाइम और सेशन के हिसाब से पैसे चार्ज करती है. ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली महिला परेशान लोगों को गले लगाकर उन्हें सुकून देती हैं और उनका दुखड़ा सुनती है. उसका एक सेशन कम से कम 8 से 10 हज़ार का होता है. 45 साल की मिसी अपने ग्राहकों की बताई जगह पर जाकर उन्हें गले लगाती हैं और उनका तनाव दूर करने में मदद करती हैं. साल 2010 से उनका ये बिजनेस चल रहा है.
झप्पी को नाम दिया है ‘कडल थेरेपी’
हम जिसे जादू की झप्पी कहते हैं, उसे मिसी कडल थेरेपी बोलती हैं. उन्होंने टीवी पर एक प्रोफेशनल कडलर को देखकर अपना काम शुरू किया था, जो चल निकला. वे करीब 99 कडलिंग पोज़िशन जानती हैं, जिन्हें काउच से लेकर बिस्तर तक आजमाया सकता है. उनका कहना है कि ज्यादा नौकरीपेशा और बुजुर्ग लोग उनके पास आते हैं, जो अपनी समस्या किसी को बता नहीं सकते. वैसे विज्ञान भी इस बात को मानता है कि गले लगने से शरीर में ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन नाम के हैप्पी हॉर्मोन्स रिलीज़ होते हैं, जो हमें सुकून देते हैं.
February 12, 2025, 11:17 IST
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