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नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने मिस्र की ममियों की गंध का अध्ययन किया है. उन्होंने पाया कि उनकी गंध आज भी लकड़ी, मसाले और मिठास जैसी है. खास एक्सपर्ट्स की मदद से पता लगाई गई इन् गंध से उन पदार्थों और प्रक्रियाओं क…और पढ़ें
अभी तक ममियों के गंध के बारे में किसी तरह की रिसर्च नहीं हुई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हाइलाइट्स
- मिस्र की ममियों की गंध लकड़ी, मसाले और मिठास जैसी है
- वैज्ञानिकों ने गैस क्रोमैटोग्राफी से ममियों की गंध का अध्ययन किया
- गंध से ममी बनाने की प्रक्रियाओं की जानकारी मिली
मिस्र के ममी दुनिया के बड़े रहस्यों में से एक है. वैज्ञानिक इस पर लंबे समय से रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर ये ममी इतनी सदियों से संरक्षित कैसे रही गईं और उन्हें संरक्षित क्यों किया गया था. इससे संबंधित पड़तालों में एक मुद्दा ममी की गंध का भी है. नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि ममी की गंध कैसी है और इसके रोचक नतीजे में पाया गया है कि इन ममी की गंध आज भी लकड़ी वाली, मसालेदार और मीठी है.
एक्सपर्ट्स की सेवाएं
मिस्र के काहिरा में यूसीएल और यूनिवर्सिटी ऑफ लजुब्लजाना के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में ममीकृत शवों से निकलने वाले रसायनों की पहचान करने के लिए गैस क्रोमैटोग्राफी का इस्तेमाल किया गया. खास बात ये थी की गंध की पहचान करने के लिए शोधकर्ताओं ने सूंघने में एक्सपर्ट लोगों की सेवाएं ली.
गंध के तीन कारक
गंध को तीन कारकों, क्वालिटी, तीव्रता और खुशी का अहसास देने वाले कारकों में बांटा गया. कुछ ममियों की गंध 5,000 साल से भी ज़्यादा पुरानी थी. हैरानी की बात ये थी शवों की गंध के बारे में वैज्ञानिकों की राय काफी सकारात्मक रहीं.
शोधकर्ताओं ने सूंघने के लिए खास प्रशिक्षित एक्सपर्ट्स की मदद ली. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Canva)
कई पैमानों को किया शामिल
यूसीएल की अनुसंधान निदेशक और व्याख्याता प्रोफेसर सेसिलिया बेमबिब्रे ने इन प्रशिक्षित सूंघने वाले एक्सपर्ट, जिन्हें स्निफर्स कहते हैं, के हुनर के बारे में बताया. ये वे लोग होते हैं जो खास शिक्षा और अभ्यास के जरिए गंध के तमाम पहलुओं के बारे बताने के साथ ही उनकी मात्रा भी बता सकते हैं. इसमें गुणवत्ता के तहत वे बता सकते हैं कि गंध लकड़ी की है या फूल वगैरह की है. मजबूत और कमजोर तीव्रता भी बता सकते हैं तो वे यह भी बता सकते हैं कि गंध बहुत ही अच्छी लगने वाली से लेकर कितनी अप्रिय है.
गंध की सूची
शोधकर्ताओं ने सूंघने के सारे कारकों को शामिल किया जिससे पुराने मिस्र की परंपरारओं के साथ पदार्थों से संबंधित थे. इसके लिए उन्होंने गंध से संबंधित पर्याप्त शब्दावली तक बना डाली जिससे ममियों की गंध की व्याख्या की जा सकी. इसके जरिए अब म्यूजियम को एक ऐतिहासिक चीजों की गंध की सूची मिल जाएगी.
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गंध का यह विश्लेषण वैज्ञानिकों को उन पदार्थों की भी जानकारी दे सकेगा जिनका ममी बनाने में इस्तेमाल हुआ है. साथ ही वे ये भी जान सकेंगे कि ये परम्परा कैसे पनपी होगी. इसके अलावा वे यह भी जान सकेंगे कि इन्हें संरक्षित कनरे के प्रयास असल में कितने सफल रहे हैं. माना जाता है कि ममी बनाने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ एंटी माइक्रोबियल, एंटी इन्फ्लेमेटरी, और प्रिजर्वेटिव वाले गुणों से भरपूर होते हैं. इसलिए ये पदार्थ स्किन केयर, कॉस्मेटिक्स और उपचार के लिहाज से अहम हो जाते हैं.
February 14, 2025, 11:59 IST
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