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अजनबी शहर में भटकी, नाम भूला,परिवार भूला… 15 साल तक भीख मांगने वाली जब भाई से मिली, तो हर कोई रो पड़ा!

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Agency:Local18

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Missing Person Found: बिहार की किरणबेन 15 साल तक गुजरात में भटकती रहीं, भीख मांगकर गुजारा किया. पालनपुर नारी संरक्षण केंद्र ने उनकी मदद की और भाई से मिलवाया.

अजनबी शहर में भटकी,नाम भूला,परिवार भूला! 15 साल तक भीख मांगने वाली भाई से मिली

15 साल बाद भाई से मिली लापता महिला

हाइलाइट्स

  • किरणबेन 15 साल बाद भाई से मिलीं, भावुक मिलन हुआ.
  • पालनपुर नारी संरक्षण केंद्र ने किरणबेन की मदद की.
  • किरणबेन को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ घर भेजा गया.

बनासकांठा: अगर आप घर से निकले और फिर कभी लौट न पाएं? अपनों की याद धुंधली हो जाए, नाम और शहर सब धुंधला पड़ जाए और जिंदगी बस अजनबियों के बीच बीतने लगे? यही दर्द, यही तन्हाई झेली है बिहार की किरणबेन ने, जो पूरे 15 साल तक अपने परिवार से बिछड़ी रहीं, लेकिन कहते हैं न, दुनिया में भले देर हो, पर इंसाफ और किस्मत कभी-कभी सही वक्त पर दरवाजा खटखटा ही देती है.

15 साल पहले छूटा घर, अनजान शहरों में भटकाव
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बुधनगरा की किरणबेन की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. मानसिक रूप से अस्थिर किरणबेन ट्रेन में बैठीं और फिर रास्ता भटक गईं. सफर ने उन्हें बिहार से गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर पहुंचा दिया, जहां वे गांव-गांव भीख मांगकर गुजर-बसर करने लगीं. न घर का पता, न कोई पहचान—बस एक अकेली महिला, जिनकी आंखों में अनकही कहानियों का समंदर था.

संरक्षण केंद्र बना उम्मीद की किरण
गांववालों ने जब पुलिस को खबर दी, तो किरणबेन को पालनपुर नारी संरक्षण केंद्र लाया गया. यहां जब पहली बार केंद्र की मैनेजर नीलोफर दीवान ने उनसे बात करने की कोशिश की, तो वे बेहद असहज और आक्रामक थीं. किसी से बात नहीं करतीं, ना ही अपना नाम-पता बता पातीं, लेकिन कहते हैं, जख्म कितना भी गहरा हो, सही देखभाल उसे भर देती है.

केंद्र की टीम ने उनकी काउंसलिंग शुरू की, सिविल अस्पताल में मानसिक उपचार हुआ, और धीरे-धीरे उनकी जुबान से कुछ नाम निकलने लगे—”मुजफ्फरपुर”, “ट्रेन”. बस, यहीं से उम्मीद की लौ जल उठी.

वीडियो कॉल पर भाई से हुआ भावुक मिलन
केंद्र की टीम ने झटपट मुजफ्फरपुर के सखी वन स्टॉप सेंटर से संपर्क किया, और खोजबीन शुरू हुई. काफी मशक्कत के बाद आखिरकार किरणबेन का घर मिल गया, और उनके भाई से संपर्क हुआ. फिर आया वो पल, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं—वीडियो कॉल पर भाई-बहन आमने-सामने थे. 15 सालों की दूरी, 15 सालों का इंतजार, और जब भाई ने बहन को पहचाना, तो शब्द नहीं, सिर्फ आंसू बहे.

घर वापसी और परिवार की खुशी
जिला कलेक्टर मिहिर पटेल की मंजूरी के बाद, किरणबेन को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ उनके वतन भेजा गया. जब वे घर पहुंचीं, तो पूरे मोहल्ले में खुशी का माहौल था. परिवार ने नारी संरक्षण केंद्र की टीम को दिल से धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस बिछड़ी बेटी को उसके घरवालों से मिलवाने का नेक काम किया.

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बता दें कि पालनपुर का नारी संरक्षण केंद्र न सिर्फ किरणबेन जैसी महिलाओं के लिए सहारा बना, बल्कि कई और पीड़ित, अनाथ, घरेलू हिंसा झेल रहीं और मानव तस्करी की शिकार महिलाओं को भी एक नई जिंदगी देने का काम कर रहा है. यहां रहने वाली महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है.

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