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हिंदी सिनेमा में 50 का दशक देवानंद, दिलीप कुमार और राज कपूर का हुआ करता था. लेकिन उनके दौर में एक ऐसा एक्टर भी था, जो इन तीनों को अकेला ही टक्कर दिया करता था. ये एक्टर और कोई नहीं बल्कि भारत भूषण थे, जिनको लोग …और पढ़ें
मधुबाला के साथ फिल्मों में उनकी जोड़ी काफी पसंद की गई.
हाइलाइट्स
- कैसे अर्श से फर्श पर आ गए भारत भूषण.
- पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर बने एक्टर.
- भाई की सलाह मानकर गलती कर बैठे थे भारत भूषण.
नई दिल्ली. कहते हैं अंत भला तो सब भला, लेकिन अक्सर ऐसा होता नहीं है. बॉलीवुड में ऐसे कितने ही नाम हैं, जिनके करियर के शुरुआती दिनों में उनका सितारा आसमान की बुलंदियों पर रहा. लेकिन उनका अंत ऐसा हुआ जिसे सुनकर आपका दिल कांप उठेगा. आज हम एक ऐसे एक्टर की सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने करियर के दौरान दिलीप कुमार, देव आनंद और राजकुमार जैसे कद्दावर एक्टरों को चुनौती दी. बॉलीवुड में कोई उन्हें ‘बेजू बावरा’ तो कोई ‘कबीर’ के नाम से जानता है. लेकिन उनकी जिंदगी का अंत ऐसे हुआ, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप उठेगी.
यूपी के मेरठ में 14 जून 1920 को भारत भूषण भल्ला का जन्म हुआ था. उनके पिता एक बड़े वकील थे और जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे. वह अपने बेटे भारत भूषण को भी बड़ा वकील बनना चाहते थे. इसी वजह से उन्होंने भारत को अलीगढ़ पढ़ने के लिए भेज दिया था. हालांकि, भारत के दिल में हिंदी सिनेमा बसा हुआ था, बस फिर क्या था जैसे ही ग्रेजुएशन पूरा किया तो कोलकाता चले गए. उन दिनों अभिनय करने के लिए मुंबई नहीं कोलकाता जाने का रिवाज था. उसके बाद उनका साल 1941 में पहली फिल्म मिली ‘चित्रलेखा’. मगर 10 साल तक वह फिल्मों में काम करते रहे लेकिन कोई पहचान नहीं बना सके. आखिरकार 1952 में आई एक फिल्म ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया फिल्म थी ‘बैजू बावरा’.
‘बैजू बावरा’ से बनाई घर-घर में पहचान
मोहम्मद रफी की आवाज और भारत भूषण के अभिनय वाली इस फिल्म ने तो कमाल कर दिया था. फिल्म रातों-रात हिट हो गई और बैजू बावरा या नहीं भारत भूषण घर-घर में पहचान बनाने में कामयाब हो गए. इसके बाद तो उन्होंने एक के बाद एक फिल्में की और अपने समकालीन एक्टर्स की नीदों को उड़ा दिया. मधुबाला के साथ उनकी फिल्म ‘बरसात की रात’ में तो बड़े पर्दें पर तहलका मचा दिया था. फिल्म ‘सावन’, ‘भाईचारा’, ‘बैजू बावरा’, ‘जन्माष्टमी’ जैसी फिल्मों से उन्होंने बॉलीवुड में अपना नाम तो बनाया ही. साथ ही बंगला, गाड़ी और मोटा बैंक बैलेंस भी कमा लिया.
भारत भूषण ने तकरीबन तीस फिल्मों में काम किया है. फोटो साभार-@IMDb
भारत भूषण ने की थी दो शादी
एक्टर ने दो शादी की थी. उनकी पहली पत्नी सरला थी, जिससे उनको दो बेटियां हुईं. दूसरी बेटी के जन्म के समय पत्नी ने दम तोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने रत्ना नाम की महिला से दूसरी शादी की. कहते हैं सफल होने के लिए लाखों जतन करने पड़ते हैं लेकिन एक छोटी सी गलती भी बर्बादी की ओर ले जाती है. भारत भूषण के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.
भाई की सलाह ने किया बर्बाद
बताया जाता है कि भारत भूषण को उनके भाई रमेश ने सलाह दी कि उन्हें फिल्में प्रोड्यूस करनी चाहिए. लेकिन कुछ फिल्मों को छोड़ सब फ्लॉप हो गईं. ‘दूज का चांद’ बनाने के बाद तो उनकी हालात बेहद खराब हो गई थी. एक-एक करके उनके सारे बंगले बिक गए, गाड़ियां बिक गईं. बस यहीं से उनकी बर्बादी का दौर शुरू हुआ. एक भी फिल्म नहीं चली और हालत यह हो गई कि भारत भूषण को अपने घर के बर्तन तक बेचने पड़ गए.
उन्होंने जिन फिल्मों पर भी पैसे लगाए वो सभी फ्लॉप हो गईं. फोटो साभार-@IMDb
पेट भरने के लिए किया जूनियर आर्टिस्ट का रोल
तंगहाली इतनी थी कि पेट भरने के लिए उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट तक का रोल करना शुरू कर दिया. एक बार अमिताभ बच्चन ने उन्हें बस स्टेशन पर देखा था. वो आम लोगों की तरह बस में चढ़ने के लिए लाइन में लगे हुए थे. कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि उन्होंने गार्ड की नौकरी भी की. हालांकि, उनकी बेटी ने इसे अफवाह करार दिया था.
72 साल की उम्र में किया दुनिया को अलविदा
तंगहाली के दौर में उन्हें दिल की बीमारी के घेर लिया था. लेकिन इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. 72 साल की उम्र में एक रात वो लेटे हुए थे. अचानक उनको तेज दर्द होने लगा. दर्द से तड़पते उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर्स उन्हें पहचान नहीं सके. अंत समय में बॉलीवुड से कोई भी कलाकार उनकी अर्थी देने के लिए नहीं पहुंचा था.
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
February 20, 2025, 15:07 IST
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