[ad_1]
Agency:Local18
Last Updated:
छत्तीसगढ़ के सरगुजा के मांझी आदिवासी जनजाति समाज में सरना पूजा का खास महत्व है. ये पूजा मांझी समाज के विराट विरासत को दर्शाता है. सरना पूजा के बाद से ही मांझी और बैंगा आदिवासी समाज में शुभ कार्य की शुरुआत होती …और पढ़ें
सरना स्थल में किचड़ में नाचते हुए लोग
रमज़ान खान/अम्बिकापुर- छत्तीसगढ़ के सरगुजा में मांझी जनजाति के लोगों में सरना पूजा होता है ख़ासकर मांझी जनजाति के लोग आज़ के दिन गौरा गौरी महादेव का पूजा अपने अनोखे अंदाज में देव स्थल सरना में जाकर करते हैं. इसके बाद से ही मांझी समुदाय में शादी विवाह का मुहूर्त शुरू हो जाता है यह परंपरा बहुत पुरानी है. मांझी समाज आज़ भी इस अनूठे परंपरा की पुरानी संस्कृतियों को संजोए हुए है. आज़ सरगुजा अंचल में रहने वाले हर मांझी समुदाय आदिवासी जनजाति के लोगों के द्वारा अपने देव स्थल सरना में पूजा किया जाता है. बैगा आदिवासियों के द्वारा गौरा गौरी महादेव का पूजा पाठ किया गया. इस पारंपरिक पूजा के बाद मांझी समुदाय में शादी विवाह का लगन शुरू हो गया सरना देव स्थल में बैगा आदिवासियों के द्वारा बकरा चढ़ाया गया बाद में देव स्थल की मिट्टी या तलाब की मिट्टी को लगाकर मिट्टी के महादेव पार्वती जैसा स्वरूप बनाकर गांव में ढोल बाजे के साथ लोग तालाब की मिट्टी में लगाकर सरना में जमकर जश्न मनाए.
यह परंपरा सरगुजा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पुरानी रीत को आज़ के इस आधुनिक युग में बचाकर रखा गया है, जहां सरना पूजा के बाद कीचड़ में नाचकर शादी विवाह में भी बारातियों का स्वागत करते हैं. जिसे देखने के लिए गांवों में लोगों की भीड़ उमड़ती है.
पूजा के बाद शुरू होता है शुभ कार्य
वहीं इस पुराने परंपरा को लेकर जब लोकल 18 की टीम ने आदिवासी समाज के बंधन नाग मांझी से इस पूजा के बारे में पूछा, तो उन्होने बताया कि इस पूजा के बाद से ही उनके ( मांझी समाज ) आदीवासी मांझी समाज में शादी विवाह की शुरुआत हो जाती है. वहीं उन्होंने आगे बताया कि सराना पूजा न सिर्फ उनके समाज में शादी विवाद शुरू होता है बल्कि इसके साथ ही उनके वहाँ और भी पारंपरिक शुभ कार्य शुरू हो जाता है.
Ambikapur Part-X,Cachar,Assam
February 21, 2025, 18:51 IST
[ad_2]
Source link