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वायरल हो रहे इस वीडियो को देखने के बाद आपकी आंखें भी आंसुओं से भर जाएंगी और आंसू छलक कर बाहर आ जाएंगे. गरीबी ने इस बच्चे का बचपना छीन लिया. अब वो अपनी अंधी मां का सहारा बन चुका है.

मां और बेटे का रिश्ता सबसे पावन होता है. मां अपने तमाम दुख-दर्द को भूलकर बेटे की देखभाल करती है. उसे हर संकट से बचाती है. खुद भूखे रहकर अपने बच्चों के लिए खाना खिलाती है. लेकिन कुछ लोग मां के इस ममता को जवानी आते ही भूल जाते हैं. उन्हें अपनी मां में तमाम खामियां नजर आने लगती हैं. लेकिन कई बार हमारी आंखों के सामने ऐसे नजारे भी आ जाते हैं, जिन्हें देखने के बाद हमारी आंखें छलक जाती हैं. आज हम आपको एक ऐसा ही वीडियो दिखाने जा रहे हैं. इस वीडियो में एक मासूम अपनी अंधी मां का सहारा बना हुआ है. मां की देखभाल करने के चक्कर में गरीबी ने इस मासूम के बचपने को छीन लिया.
इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को अनिल कुमार (@anil_jatav14) ने शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि जमीन पर एक बुजुर्ग महिला लेटी हुई है. वीडियो में बताया गया है कि वो अंधी है. ठंड के मौसम में भी महिला के पास सोने के लिए बिस्तर नहीं है. लेकिन बच्चे ने अपनी अंधी मां को स्वेटर पहना रखा है, जबकि खुद बिना शर्ट के बैठा हुआ है. उसके सामने थाली में पका हुआ चावल रखा है, जिसे वो अपने हाथों से ठीक कर रहा है. चूकि गरीबी की वजह से बच्चे के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं है. ऐसे में वो चावल में पानी डालता है और अपनी अंधी मां के मुंह में निवाला डालता है. फिर खुद भी खाता है. मां जमीन पर लेटकर खाती हुई नजर आ रही है. शायद उसके शरीर में इतनी जान नहीं बची कि वो बैठ सके.
सोचिए, जिस उम्र में बच्चे खुद मां के हाथों से खाना खाते हैं. उस मासूम बच्चे का बचपना गरीबी ने छीन लिया. इस गरीबी ने उसे इतना समझदार बना दिया कि वो अब अपनी मां की देखभाल कर रहा है. हालांकि, सोशल मीडिया पर यह वीडियो भले ही वायरल हो रहा है, लेकिन यह कहां का है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है. न्यूज 18 हिंदी इस वीडियो के सच्चाई की पुष्टि नहीं करता है. लेकिन कई लोगों ने इस वीडियो को देखने के बाद मदद का हाथ आगे बढ़ाया है. गुजरात के कच्छ जिले के रापर के रहने वाले नरेश राठौर ने अपना मोबाइल नंबर शेयर करते हुए लिखा है कि मैं जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक इस गरीब बच्चे और इसकी मां को खाना-पीना खिलाउंगा. बच्चे को पढ़ाऊंगा. वीडियो का कैप्शन है, ‘अंधी मां पर गरीबी का कहर.’
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