[ad_1]
Viral Facts: सोचिए…आप किसी शांत झील में आराम से तैर रहे हों और अचानक नीचे आपको ईंटों के बने घर, सड़क-इमारतें और सदियों पुराने कब्रिस्तान की झलक दिखाई दे जाए, ऐसा नजारा डर भी पैदा कर सकता है. साथ ही उसे देखने के लिए आपके मन में उत्सुकता भी पैदा होगी.
किर्गिस्तान की इस्सिक-कुल झील में बिल्कुल यही हुआ. वैज्ञानिकों के सामने 600 साल से पानी के नीचे छिपी एक पूरी इस्लामिक बस्ती, सिल्क रूट का व्यस्त व्यापारिक केंद्र और रहस्यों से भरी एक मध्यकालीन बस्ती सामने आ गई है.
Popular Mechanics की रिपोर्ट बताती है कि यह इलाका कभी रेशम, मसालों और अनमोल वस्तुओं का महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग था. रूसी अकादमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार, 15वीं सदी में आए भीषण भूकंप ने इस बस्ती को पूरी तरह निगल लिया. जहां कभी मस्जिदों की अजान और बाजारों की चहल-पहल थी, वहां अब सिर्फ झील की शांत लहरें रह गई हैं.
झील की सतह से करीब 13 फीट नीचे जो अवशेष मिले, उनमें शामिल हैं. ईंटों से बनी इमारतें और पुरानी मिलस्टोन जिसे अनाज पीसने वाली चक्की भी कहते हैं, लकड़ी के ढांचे साथ ही कीमती मिट्टी के बर्तन और इस्लामिक कब्रिस्तान, जिसमें दो कब्रें मक्का की दिशा में बनी थीं.
खोजकर्ताओं का कहना है, कि दृश्य देखकर ऐसा लगा जैसे किसी कहानी का वास्तविक “अंडरवॉटर अटलांटिस” अचानक सामने आ गया हो. इमारतों की बनावट से यह भी अनुमान लगाया गया कि यहां कभी मस्जिद, हमाम और इस्लामिक शिक्षण संस्थान मौजूद रहे होंगे.
भूकंप ने शहर को तबाह कर दिया, लोग वहां से पलायन कर गए और धीरे-धीरे इस बस्ती का नामो-निशान तक इतिहास से गायब हो गया.
सदियों बाद जाकर पता चला कि शांत झील की गहराइयों में कभी एक समृद्ध और चहल-पहल से भरा शहर बसता था. यह खोज फिर से साबित करती है कि धरती के जलस्रोत सिर्फ जीव-जंतुओं को ही नहीं, बल्कि इतिहास के अनगिनत रहस्यों को भी अपने भीतर छुपाए रखते हैं और सही समय आने पर वे खुद अपनी कहानी दुनिया को सुना देते हैं.
[ad_2]
Source link