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Women of Agra are becoming self-reliant by knitting shoes – Uttar Pradesh News

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आगरा की पहचान सिर्फ जूता नगरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की महिलाएं भी अपने हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल लिख रही हैं. घर बैठे जूतों की बुनाई कर महिलाएं न केवल परिवार का खर्चा उठा रही हैं बल्कि सालाना लाखों रुपये तक कमा रही हैं, जिससे उनके जीवन में आर्थिक मजबूती आई है.

रिपोर्ट- आदित्य मुदगल, आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा की महिलाएं आज घर बैठे आत्मनिर्भर बन रही हैं. घर-गृहस्थी के काम निपटाने के बाद ये महिलाएं जूतों की बुनाई कर न सिर्फ अपने परिवार का आर्थिक सहयोग कर रही हैं, बल्कि सालाना लाखों रुपये की कमाई भी कर रही हैं.

आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में स्थित लंबी गली इसका बड़ा उदाहरण है. यहां लगभग हर घर की महिलाएं जूते की अपर बुनाई का काम करती हैं. महिलाएं तैयार किया गया अपर फैक्ट्री या वर्कशॉप को भेज देती हैं, जहां जूतों में सोल और बाकी काम किए जाते हैं.

महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया
कई महिलाएं इसे टाइमपास का साधन मानकर शुरू करती हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके लिए बड़ी आय का जरिया बन जाता है. महिला मछला बताती हैं कि वह पिछले 40 सालों से घर बैठकर जूते की बुनाई कर रही हैं. परिवार में कमाने वाला कोई न होने के कारण यह काम उनके जीवन-निर्वाह का सहारा बन गया है. इसी तरह महिला अनोखी कहती हैं कि वह सभी तरह के डिजाइन वाले जूतों की बुनाई करती हैं. उनकी गली की लगभग हर महिला इस काम से जुड़ी है. कोई फैक्ट्री जाकर काम करता है तो कोई घर पर ही रहकर। इस काम से घर का खर्चा आराम से निकल जाता है.

जूता नगरी है आगरा
आगरा को जूता नगरी कहा जाता है. यहां सैकड़ों जूता फैक्ट्रियां हैं, जहां पुरुषों के साथ महिलाएं भी बड़ी संख्या में काम करती हैं. जो महिलाएं फैक्ट्री नहीं जा पातीं, वे घर पर ही जूते की बुनाई कर आत्मनिर्भर बन रही हैं.

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आगरा की गलियों से फैक्ट्रियों तक, महिलाओं का हुनर चमका रहा जूता उद्योग

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