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नई दिल्ली. भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा को एक नया ढांचा देने के लिए बहुत बड़ा फैसला किया है. दूरसंचार विभाग यानी DoT ने आदेश जारी किया है कि अब भारत में बिकने वाला हर नया स्मार्टफोन संचार साथी ऐप के साथ ही आएगा. खास बात यह है कि यह ऐप फोन में पहले से इंस्टॉल होगा और इसे हटाया नहीं जा सकेगा. मौजूदा फोन में भी यह ऐप अनिवार्य अपडेट के जरिए डाला जाएगा. एप्पल (Apple), सैमसंग (Samsung), शाओमी (Xiaomi), ओप्पो (Oppo), वीवो (Vivo) सभी कंपनियों के फोन पर यह नियम लागू होगा.
यह फैसला उस समय आया है जब सरकार ने हाल ही में वॉट्सऐप, सिग्नल और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म को भी SIM लिंकिंग अनिवार्य करने का आदेश दिया है. यानी जिस SIM से आपका अकाउंट बना है, वही सक्रिय होना चाहिए. SIM बदलते ही ऐप तक पहुंच खत्म हो सकती है और वॉट्सऐप वेब जैसे फीचर हर छह घंटे में ऑटो लॉगआउट होंगे.
स्मार्टफोन कंपनियों पर सीधे फोकस
अब सरकार का फोकस सीधे स्मार्टफोन कंपनियों पर है. DoT ने कहा है कि सभी कंपनियां अगले 90 दिनों के भीतर नए फोन में संचार साथी को प्रीइंस्टॉल करें और यह ऐप सेटअप के दौरान ही दिखे. पुराने डिवाइस जो पहले ही बनकर बाजार में पहुंचे हैं, उनमें भी इसे अनिवार्य अपडेट के जरिए भेजना होगा.
सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने साफ कहा है कि यह कदम टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी नियमों के तहत उठाया जा रहा है. इसका उद्देश्य नकली, डुप्लीकेट या स्पूफ्ड IMEI वाले फोन पर रोक लगाना है. DoT ने चेतावनी दी है कि एक ही IMEI कई लोकेशन पर मौजूद होना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है. यह पुलिस और साइबर एजेंसियों को अपराधियों तक पहुंचने में बड़ी बाधा पैदा करता है.
भारत का सेकेंड हैंड स्मार्टफोन बाजार बहुत बड़ा है और यहीं धोखाधड़ी की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं. चोरी या ब्लैकलिस्टेड फोन अक्सर सेकेंड हैंड मार्केट में आ जाते हैं. संचार साथी इसमें मदद करता है. इस ऐप के जरिये ग्राहक फोन खरीदने से पहले IMEI चेक कर सकता है कि यह ब्लॉक तो नहीं है.
पहले से उपलब्ध थी ऐप, अब हुई अनिवार्य
सरकार के मुताबिक संचार साथी पहले से उपलब्ध था और इसके 50 लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं. सितंबर तक 37.28 लाख चोरी या खोए फोन इस प्लेटफॉर्म से ब्लॉक किए गए और 22.76 लाख फोन ट्रेस भी किए गए.
ऐप की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह IMEI का इस्तेमाल करके चोरी या गुम फोन को ब्लॉक और खोजने में मदद करता है. साथ ही यह नकली फोन मार्केट पर भी सीधे वार करता है. ऐप सिर्फ फोन ट्रैकिंग नहीं करता बल्कि संदिग्ध कॉल, फर्जी मैसेज और OTT मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे वॉट्सऐप पर आए फ्रॉड को भी रिपोर्ट करने की सुविधा देता है.
कैसे काम करता है संचार साथी ऐप
- हर मोबाइल का एक यूनिक IMEI नंबर होता है: ये 15 अंकों का आईडी है जो आपके फोन की पहचान बताता है. संचार साथी इसी नंबर की मदद से फोन को ब्लॉक या ट्रेस करता है.
- ऐप सरकार के CEIR सिस्टम से जुड़ा है: CEIR यानी Central Equipment Identity Register. भारत सरकार का वह डेटाबेस जिसमें देश में इस्तेमाल किए जा रहे हर फोन का IMEI रिकॉर्ड होता है. यही चोरी या खोए फोन के IMEI को बंद करता है.
- फोन खो जाने पर आप ऐप में ‘लॉस्ट/स्टोलन’ रिपोर्ट करते हो: जैसे ही रिपोर्ट करते हो, ऐप आपकी शिकायत CEIR सिस्टम में भेज देता है. CEIR तुरंत उस IMEI को ब्लॉक कर देता है. ब्लॉक होने के बाद फोन किसी भी सिम पर नेटवर्क पकड़ ही नहीं सकता.
- पुलिस और टेलीकॉम कंपनियां फोन ट्रेस करने लगती हैं: फोन का IMEI जब भी किसी भी नेटवर्क पर दिखाई देता है, सिस्टम उसकी लोकेशन (टॉवर लोकेशन) कैप्चर कर लेता है. इससे फोन ट्रैक करने में मदद मिलती है.
- मिल जाने पर आप ‘अनब्लॉक’ रिक्वेस्ट करते हो: एक बार फोन मिल गया तो ऐप के जरिए उसी IMEI को फिर से एक्टिव किया जा सकता है.
- सेकंड हैंड मोबाइल खरीदने से पहले IMEI चेक कर सकते हो: ऐप में ‘Know Your Mobile’ फीचर है. इसमें IMEI डालते ही पता चल जाता है कि फोन चोरी का तो नहीं, ब्लैकलिस्ट तो नहीं और वैध है या नहीं.
फ्रॉड कॉल, स्कैम मैसेज और व्हाट्सऐप ठगी की शिकायत भी यहीं होती है: ऐप में ‘Report Fraud’ सेक्शन है. इसमें आप कोई भी सस्पिशियस नंबर, कॉल, मैसेज या व्हाट्सऐप धोखाधड़ी तुरंत रिपोर्ट कर सकते हो. रिपोर्ट सीधे डोT की साइबर यूनिट और संबंधित टेलीकॉम कंपनी को जाती है.
फोन बदलो, नंबर बदलो… फिर भी ऐप से ट्रेकिंग जारी रहती है: IMEI नंबर नहीं बदलता, चाहें सिम बदल लो या रीसेट कर दो. इसलिए चोर फोन का IMEI बदलकर ही बच सकते हैं, लेकिन DoT अब IMEI को छेड़छाड़ प्रूफ बनाने पर भी काम कर रहा है.
यूजर सिक्योरिटी पर जोर
सरकार का कहना है कि नए नियमों से यूजर सुरक्षा मजबूत होगी, साइबर फ्रॉड में कमी आएगी और मोबाइल की असली पहचान को ट्रैक करना आसान होगा. तीन महीने में यह नियम पूरी तरह लागू कर दिए जाएंगे और चार महीने में कंपनियों को अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी.
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