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Gold Investment: जमशेदपुर में संदीप बर्मन ने लोकल 18 से कहा, फिजिकल गोल्ड परंपरा और सुरक्षा के लिए बेहतर है, जबकि डिजिटल गोल्ड सुविधा और आधुनिकता के लिए स्मार्ट विकल्प है.
जमशेदपुर. भारतीय बाजार में इन दिनों सोने के दाम में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. कभी सोना आसमान छूता है तो कभी कुछ दिनों में ही दामों में गिरावट आ जाती है. ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर सोने में निवेश किस रूप में किया जाए. फिजिकल गोल्ड (भौतिक सोना) या डिजिटल गोल्ड. इस पर लोकल 18 से बात करते हुए गोल्ड एक्सपर्ट संदीप बर्मन ने अपनी राय साझा की.
संदीप बर्मन के अनुसार, भारत जैसे देश में सोना केवल निवेश का साधन नहीं बल्कि भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा हुआ विषय है. हर परिवार में सोना एक धरोहर की तरह माना जाता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता है. इसी कारण लोग अभी भी फिजिकल गोल्ड यानी कि असली सोने पर अधिक भरोसा करते हैं. उनका मानना है कि जब तक सोना हमारी आंखों के सामने न हो या हमारे पास न रखा हो, तब तक भारतीय उपभोक्ता उसे ‘अपना’ नहीं मानते.
फिजिकल और डिजिटल गोल्ड में क्या है फर्क
हालांकि, बदलते समय के साथ डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है. डिजिटल गोल्ड में निवेश करना आसान, सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है. इसे मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदा जा सकता है. न तो इसे रखने की जगह की जरूरत पड़ती है और न ही चोरी का डर होता है. इसके अलावा, छोटे अमाउंट से भी इसमें निवेश शुरू किया जा सकता है, जो युवाओं के लिए एक बेहतर विकल्प बन गया है.
फिर भी एक्सपर्ट का मानना है कि डिजिटल गोल्ड में कुछ जोखिम भी छिपे हैं. अगर किसी कंपनी का दिवालिया निकल जाए या देश में आर्थिक संकट जैसी स्थिति आ जाए, तो डिजिटल गोल्ड का मूल्य प्रभावित हो सकता है. वहीं फिजिकल गोल्ड आपके पास होता है, जिसे आप कभी भी बेचकर नकदी में बदल सकते हैं. संकट की घड़ी में यह आपके लिए “सुरक्षित जमा पूंजी” का काम करता है.
जोखिम ध्यान में रखना समझदारी
अंत में बर्मन का कहना है कि दोनों ही विकल्पों के अपने-अपने फायदे हैं. जो लोग परंपरा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए फिजिकल गोल्ड बेहतर है. वहीं, जो लोग आधुनिक निवेश के साधन और सुविधा की ओर झुकाव रखते हैं, उनके लिए डिजिटल गोल्ड एक स्मार्ट विकल्प साबित हो सकता है. निवेश करने से पहले अपने उद्देश्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना ही समझदारी भरा कदम होगा.
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