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Goat Farming Business Tips: बकरी पालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रहा है. यह न केवल रोजगार का एक बेहतर साधन है, बल्कि कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय भी है. अगर आप किसान हैं और अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं, तो यह व्यवसाय आपके लिए सुनहरा अवसर बन सकता है. जानें खास बातें… (रिपोर्ट: सावन पाटिल/खंडवा)

आजकल बकरी पालन तेजी से लोकप्रिय व्यवसाय बनता जा रहा है. यह एक ऐसा बिजनेस है जो खेती के साथ-साथ किया जा सकता है. बकरे का मांस, बकरी दूध और उसकी संतानों से होने वाली आमदनी किसानों को सालभर स्थायी मुनाफा देती हैं. यही कारण है कि कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर अब बकरी पालन की ओर रुख कर रहे हैं.

बकरी पालन की सबसे खास बात ये कि इसे कम पूंजी और कम जगह में शुरू किया जा सकता है. जयदीप कुशवाहा जैसे अनुभवी किसान बताते हैं कि “अगर कोई मेहनत और लगन से बकरी पालन करता है, तो उसे नुकसान होने की संभावना बहुत कम रहती है. एक बकरी से तीन बच्चे तक साल में मिल जाते हैं, जो कुछ ही महीनों में हजारों में बिक जाते हैं.

भारत में कई तरह की बकरी की नस्लें पाई जाती हैं, लेकिन कुछ नस्लें ऐसी हैं जो अपनी तेजी से बढ़ने और बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. इनमें बीटल, सिरोही, जमुनापारी, बरबरी और ब्लैक बंगाल प्रमुख हैं. जमुनापारी नस्ल को “बकरियों की रानी” कहा जाता है. इसका मटन स्वादिष्ट और बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है.
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सिरोही नस्ल राजस्थान की मशहूर नस्ल है जो गर्म और सूखे इलाकों में भी अच्छे से पनपती है. बरबरी नस्ल छोटे कद की होती है लेकिन दूध उत्पादन में यह सबसे आगे है. ब्लैक बंगाल नस्ल का मांस बेहद स्वादिष्ट होता है और यह पूर्वी भारत में बहुत लोकप्रिय है. इन नस्लों की एक बकरी 10 से 15 हजार रुपये तक आसानी से बिक जाती है, जबकि अच्छी नस्ल के नर बकरे की कीमत 25 से 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है.

बकरी पालन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे ज्यादा खर्च में नहीं करना पड़ता. एक बकरी के लिए रोजाना 2–3 किलो चारा और साफ पानी की जरूरत होती है. खेतों के आसपास की झाड़ियाँ, पत्तियाँ और बचे हुए फसल के डंठल इनका मुख्य भोजन होते हैं. इस कारण चारे पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता.

निमाड़ क्षेत्र के कई किसान बताते हैं कि बकरी पालन के लिए किसी महंगे शेड या उपकरण की जरूरत नहीं होती. स्थानीय स्तर पर बने साधारण बाड़े में भी बकरियों को पाला जा सकता है. बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी किसानों की मदद कर रही है.

राज्य सरकार और केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना के तहत किसानों को बकरी खरीदने पर 35 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है. इसके अलावा प्रशिक्षण और टीकाकरण की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है. कई जिलों में पशुपालन विभाग द्वारा किसानों को बकरियों के रखरखाव और पोषण पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है.

केशव दागोरे बताते हैं कि उन्होंने 10 बकरियों से शुरुआत की थी और आज उनके पास 60 से अधिक बकरियां हैं. हर साल वे लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा लेते हैं. उनके अनुसार, बकरी पालन में धैर्य और नियमित देखभाल जरूरी है, जैसे समय पर टीकाकरण, स्वच्छता और पौष्टिक आहार देना.
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