[ad_1]
Jhansi Snake Bite: 75 वर्षीय बुजुर्ग की जिंदगी किसी हॉरर फिल्म की कहानी से कम नहीं है. अब आप सोच रहे होंगे कि हम ऐसा क्यों कह रहे है. दरअसल, झांसी के पट्टी कुम्हर्रा गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग सीताराम को सांप ने एक-दो बार नहीं, बल्कि पिछले 42 सालों में 14 बार डसा है, लेकिन हर बार वो किसी तरह बच निकलते हैं. यहां खास बात यह है कि सांप द्वारा डसने से पहले उन्हें या उनकी पत्नी को दो दिन पहले सपने में सांप दिखाई देता है.
जी हां…यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है. आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं, इससे पहले भी मेरठ, बागपत ही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी सामने आ चुके हैं. हालांकि, यह बात सच है या उन लोगों का कोई वहम…इसको लेकर फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है. लेकिन, इस अजीब घटनाक्रम से हर कोई हैरान है.
42 सालों में 14 बार डस चुका है सांप
सांप द्वारा डसे जाने की यह रहस्यमयी घटना झांसी जिले से सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीताराम अहिरवार को पिछले 42 सालों में 14 बार सांप ने डसा, लेकिन हर बार वो किसी तरह बच निकलते हैं. उनकी यह हैरान कर देने वाली कहानी अबन सिर्फ गांव में चर्चा का विषय बन चुका है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों की हैरानी का कारण बन रहा है.
डंसने से पहले पत्नी के सपने में आकर देता है चेतावनी
सीताराम बताते हैं कि वे परिवार के साथ गांव में खेती-बाड़ी करते हैं. जब वे केवल 25 साल के थे, तब पहली सांप ने उन्हें अपना शिकार बनाया था. उस समय उन्हें गांव के खैरापति मंदिर ले जाया गया, जहां झाड़फूंक से उनकी जान बचाई गई. तब से लेकर आज तक यही सिलसिला चला आ रहा है. इसी के बाद से जब भी सांप उनके पास आता है, दो दिन पहले सीताराम या उनकी पत्नी दिलकुवंर को सपने में सांप दिखाई देता है.
सांप के डसने के बाद अक्सर बेहोश हो जाते हैं सीताराम
यह सपना परिवार के लिए चेतावनी का काम करता है और घर में डर का माहौल बन जाता है. सांप के डसने के बाद सीताराम अक्सर बेहोश हो जाते हैं. फिर उन्हें मंदिर ले जाकर तांत्रिक शिरोमन सिंह बुंदेला और कमलेश द्वारा झाड़फूंक की जाती है. तांत्रिक उनके हाथ में उर्द के दाने बांधते हैं, जिन्हें वह कहते हैं कि जब तक दाने बने रहते हैं, सांप उन्हें नहीं काट सकता. लेकिन जैसे ही दाने गायब होते हैं, सांप डस लेता है.
आखिर मेरे पीछे क्यों पड़ा है सांप?
गांव वाले इसे भगवान की लीला और रहस्य मानते हैं. तो वहीं, कुछ इसे नाग-नागिन का बदला, कुछ पिछले जन्म का पाप और कुछ पुनर्जन्म की दुश्मनी. मंदिर परिसर में यह चर्चा इस कदर फैल गई है कि लोग अब सीताराम को ‘नागों का शिकार’ कहकर बुलाने लगे हैं. सीताराम कहते हैं, ‘मैंने जिंदगी का लंबा सफर तय कर लिया है, अब डर नहीं लगता. लेकिन समझ नहीं आता कि यह सांप आखिर मेरा पीछा क्यों कर रहा है?’
[ad_2]
Source link