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नई दिल्ली. पंद्रह मैचों में 23 की औसत के साथ उपकप्तान और 14.4 की औसत से कप्तान तो सवाल बड़ा ये कि कैसे जीतेगा हिंदुस्तान, गिल पर दबाव साफ़ नज़र आने लगा है सूर्य भी उसी नाव में सवार हैं. भारत के कप्तान और उपकप्तान को रन चाहिए, वह भी बिना किसी देरी के. विश्व कप करीब आ रहा है, और दो प्रमुख बल्लेबाज़ों की इस फॉर्म ने अचानक चिंता बढ़ा दी है. अगर टॉप-3 में से दो बल्लेबाज़ लगातार रन नहीं बना रहे हों, तो दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट से पहले हालात कैसे सही हो सकते हैं संजू सैमसन और यशस्वी इंतज़ार में हैं, और अगर धर्मशाला में हालात नहीं बदले, तो चर्चाएँ और तेज़ होंगी.
खेल हमेशा प्रदर्शन पर टिका होता है. यही एकमात्र पैमाना है प्रतिभा का कोई मतलब नहीं जब स्कोरबोर्ड पर रन न हों. गिल की क्षमता पर कोई सवाल नहीं, लेकिन आँकड़ों में सुधार जरूरी है यह कड़वी सच्चाई है. प्रतिभा उन्हें लंबी रस्सी दे सकती है, और दी भी है, लेकिन अब उन्हें बड़ी पारियाँ खेलकर अपनी जगह साबित करनी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो सवाल उठेंगे और सही भी है. खेल में चीजें बहुत जल्दी बिगड़ सकती हैं, और गिल, जो नेट्स में अच्छे दिखते हैं, अब मैदान में रन बनाकर इसे साबित करें.
सूर्यकुमार पर लगा ग्रहण!
रन ना बना पाने की बात सूर्या पर सबसे ज्यादा लागू होती है. काफी समय हो गया है जब भारत के कप्तान ने कोई धुआँधार पारी खेली हो अगर वह जल्द नहीं हुआ, तो उन पर लगने वाली निगाहें और तीखी होंगी. दरअसल, अब बढ़ने लगी हैं. आइए देखें कि चंडीगढ़ में उनके आउट किस तरह हुए. दोनों विकेट टेस्ट मैच जैसे थे. नगिड़ी ने गेंद को आखिरी क्षण में बाहर की ओर निकाला, और गिल ने उसे स्लिप में थमा दिया. उपकप्तान के लिए गोल्डन डक. सूर्या, एक अच्छे शॉट के बाद, बाहर जाती गेंद पर हाथ लगा बैठे और हल्का-सा किनारा लगा.
टीम इंडिया की टेंशन
अब बड़ा ये हा कि भारतीय टीम के लिए ये मुश्किल है कि क्या करे, विश्व कप से पहले ज़्यादा मैच नहीं बचे, इसलिए फैसले मुश्किल हैं. क्या वे गिल पर भरोसा रखकर फॉर्म ढूँढ़ने का समय देंगे या यशस्वी को आजमाया जाएया, क्या सैमसन को ऊपर भेजकर, गिल को 3 नंबर और SKY को 4 पर खेलाया जाए, और दुबे को बाहर किया जाए, दुबे ने भी हाल में बल्ले से ज्यादा योगदान नहीं दिया है, और इस पर तुरंत फैसला लेना होगा. गिल को तीन पर भेजने से सैमसन अभिषेक की पुरानी सफल ओपनिंग जोड़ी फिर से बन सकती है, जिसने पिछले साल भारत को कई मैच जिताए थे. कुछ भी जल्दबाज़ी में नहीं होगा और होना भी नहीं चाहिए. ये बड़े खिलाड़ी हैं, और जब तक बदलाव की ज़रूरत पर भरोसा नहीं हो जाता, गंभीर और उनकी टीम कोई हड़बड़ी नहीं करेगी. लेकिन सवाल वही है कितना इंतज़ार किया जाए और कितने और मैच भारत को विश्व कप में एक ऐसी टीम के साथ उतरना होगा जो खिताब बचा सके, और इस बार गलती की कोई गुंजाइश नहीं है. आगे अहम मुकाबले आने वाले हैं.
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