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बॉलीवुड की कई फिल्मों में अक्सर भारत-पाकिस्तान युद्ध को दिखाया गया है. आजादी के बाद शुरुआती सालों में कई ऐसी फिल्में आईं, जिनमें सिर्फ भारत-पाकिस्तान के विभाजन और त्रासदी को दिखाया गया. लेकिन साल 1963 में आई फिल्म में भारत के पड़ोसी देश बर्मा और जापान के बीच युद्ध की झलक दिखाई गई.

62 साल पहले आई इस फिल्म में दिखाया गया कि जब हीरो बर्मा (म्यांमार) में काम कर रहा था, तब वहां पर जापान हवाई हमला करता है. इस हमले में हजारों लोग मारे जाते हैं. हीरो को लगता है कि उसकी पत्नी और बहन भी मर गई. इस युद्ध के सींस को फिल्म का टर्निंग प्वाइंट माना गया. यह फिल्म तब सुपरहिट हुई थी. (यूट्यूब वीडियोग्रैब)

साल 1963 में आई इस फिल्म में अशोक कुमार लीड रोल में थे और उनके अपॉजिट निरुपा रॉय थीं. फिल्म में महमूद, ललिता पवार और मनोज कुमार समेत उस दौर के कई बड़े और प्रतिभाशाली कलाकार थें. फिल्म का नाम ‘गृहस्थी’ है. आईएमडीबी पर इसकी रेटिंग 7.5 है. (यूट्यूब वीडियोग्रैब)

‘गृहस्थी’ हॉलीवुड फिल्म ‘द रिमार्केबल मिस्टर पेनीपैकर’ से इंस्पायर थी. फिल्म की कहानी एक सच्ची घटना से ली गई थी, जिसमें एक ट्रक ड्राइवर की दो पत्नियों वाली जिंदगी का जिक्र था. ‘गृहस्थी’ ने फैमिली ड्रामा की शैली में नई दिशा दी और दर्शकों को भावुक कर दिया. यह फिल्म 28 फरवरी 1963 को बॉम्बे के नाज थिएटर में प्रीमियर हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की. (यूट्यूब वीडियोग्रैब)
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फिल्म की कहानी अशोक कुमार के किरदार हरिशचंद्र खन्ना इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बड़ा बिजनेसमैन उद्योगपति हैं. हरिशचंद्र दिल्ली में ऑटोमोबाइल फैक्टरी चलाते हैं और सप्ताह के पांच दिन वहां रहते हैं, जबकि वीकेंड पर मेरठ में अपने परिवार के पास लौटते हैं. उनका परिवार बड़ा है- पत्नी माया (निरूपा रॉय), सात बेटियां, एक बेटा, विधवा बहन (ललिता पवार) और उसका बेटा जग्गू (महमूद). (फोटो साभः आईएमडीबी)

परिवार खुशहाल लगता है, लेकिन हरिश की जिंदगी में एक बड़ा रहस्य छिपा है. जब उनकी बेटी की सगाई के मौके पर यह रहस्य खुलता है, तो पूरा परिवार हिल जाता है. हरिश की दोहरी जिंदगी– दो परिवार, दो पत्नियां – का खुलासा होता है. दूसरी पत्नी राधा (देविका) माया की छोटी बहन है, जिसे माया मृत मानती है. कहानी विश्व युद्ध द्वितीय के दौरान की घटनाओं से जुड़ी है, जहां बॉम्बिंग में माया और अन्यों को मृत मान लिया जाता है, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आती है. (यूट्यूब थंबनैल)

फिल्म में रिश्तों की उलझनों को बड़ी संवेदनशीलता से दिखाया गया है. हरिश को अपनी ससुर (गजानन जगिरदार) से किया वादा निभाने के लिए और दोनों बहनों को खुश रखने के लिए दो शादियां करनी पड़ती हैं. हरिश की शादी दोनों बहनों से होती हैं और दोनों को इसकी खबर भी नहीं होती. (फोटो साभः आईएमडीबी)

‘मदर इंडिया’ मैगजीन ने इसे जनता की पसंद बताया, जबकि ‘थॉट’ जर्नल ने ‘डेयरिंगली डिफरेंट डोमेस्टिक ड्रामा’ कहा. बॉक्स ऑफिस पर यह ‘बॉक्स-ऑफिस बोनांजा’ साबित हुई. दर्शकों ने इसके भावुक प्लॉट, हास्य और संगीत की तारीफ की. आज भी यह फिल्म क्लासिक मानी जाती है

इस फिल्म का लीगेसी जारी है. यह बॉलीवुड में बहुपत्नीत्व और परिवारिक रहस्यों पर बनी पहली प्रमुख फिल्मों में से एक है. अशोक कुमार की यह भूमिका उनके करियर की हाइलाइट्स में शुमार है, जबकि मनोज कुमार को इससे स्टारडम मिला. कुल मिलाकर, ‘गृहस्थी’ भारतीय सिनेमा की धरोहर है, जो 60 साल बाद भी प्रासंगिक है. (प्राइम वीडियो)
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