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क्या आप जानते हैं कि 1895 में लंदन में एक अजीबोगरीब नियम था. वहां रात के दस बजे से सुबह के सात बजे तक बीवी की पिटाई करना मना था. इसके बाद पति अपनी बीवी की जमकर पिटाई कर सकता था.
पत्नियों की पिटाई का तय था समय (इमेज- फाइल फोटो)1895 का लंदन काफी एडवांस था. विक्टोरियन युग की चमचमाती सड़कें, घोड़ा-गाड़ियां और कोहरे भरी रातें. लेकिन इन सबके पीछे एक काला सच था. औरतों की जिंदगी पर पुरुष का पूरा हक था. ऐसे कई नियम थे, जिसे जानने के बाद आपके होश उड़ जायेंगे. इसी बीच सिटी ऑफ लंदन में एक बाय लॉ (स्थानीय कानून) लागू हुआ जिसे सुनकर आज भी कलेजा मुंह को आता है.
कोई भी पुरुष रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक अपनी पत्नी को नहीं पीट सकता है. इस नियम को सुनकर आपको लग रहा होगा कि ये कितना अच्छा नियम है. इससे महिलाओं के हित के लिए बनाया गया होगा. लेकिन आपको बता दें कि ये नियम असल में महिलाओं की हिफाजत के लिए नहीं बल्कि उनकी मज़बूरी को दर्शाता था. आखिर क्या था इस नियम का कारण. आइये आपको भी बताते हैं.
नियम नहीं महिलाओं की बेबसी
इस कानून का मकसद औरतों को बचाना बिल्कुल नहीं था. इसका मकसद था पड़ोसियों की नींद को खराब होने से बचाना. जी हां, पुलिस और कोर्ट का तर्क था कि रात में चीखें-चिल्लाहट से public peace disturb होता है, लोग सो नहीं पाते हैं. इसलिए सिर्फ रात के इन 9 घंटों में पिटाई पर रोक लगाई जाए. बाकी 15 घंटे मर्दों के पास महिलाओं की पिटाई का फ्री पास रहता था. वो जमकर पत्नी को मार सकते थे. कोई भी महिला को बचाने नहीं आता था. लेकिन सिर्फ रात के तय समय पर महिला को मारना मना था.
अनुशासन का मतलब पिटाई
उस दौर में बीवी को मारना उसे डिसिप्लिन सिखाना समझा जाता था. बीवी को “अनुशासन” में रखने के लिए पति जितनी मर्जी पिटाई कर सकता था. ये सोच इंग्लैंड के पुराने कॉमन लॉ से आई थी. 19वीं सदी तक मशहूर था “Rule of Thumb” यानी पति अपनी पत्नी को पीट सकता है, बशर्ते छड़ी उसके अंगूठे से मोटी ना हो. 1895 का ये बायलॉ उसी सोच का “सभ्य” वर्जन था. कोर्ट के रिकॉर्ड्स में कई केस दर्ज हैं, जो इस नियम को क्लियर करते हैं. एक पति ने रात 10:45 बजे बीवी को मारा. पुलिस आई और पति को पकड़ कर ले गई. कोर्ट ने पति पर जुर्माना ठोंक दिया. लेकिन ये जुर्माना सिर्फ “रात में शोर करने” के लिए था. पिटाई के लिए कोई सजा नहीं दी गई. वहीं एक और केस में पति ने दिन के 3 बजे बीवी को इतना मारा कि उसकी हड्डी टूट गई लेकिन कोर्ट ने कहा “moderate correction था, केस खारिज हो गया.
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