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Nawada hospital kept two relatives as collateral for stretcher

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Nawada News: बिहार के नवादा से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना अकबरपुर के सरकारी अस्पताल से सामने आई है. जहां आरोप है कि एक महिला की मौत के बाद परिजनों को एंबुलेंस नहीं दी गई. उल्टा स्ट्रेचर देने के बदले दो लोगों को गिरवी रख लिया गया. अब पूरा मामला वायरल हो गया है.

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नवादा: देखिए बिहार के नवादा जिले से मानवीय संवेदनाओं को शर्मसार करता एक वीडियो सामने आया है. जो नवादा के स्वास्थ्य व्यवस्था ही नहीं राज्य सरकार के स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही हैं. यहां अकबरपुर प्रखंड अस्पताल ने इलाज के लिए आई एक महिला की मौत होने पर उसके परिजनों को एंबुलेंस तक देर रात मुहैया नहीं कराया, बल्कि परिजनों को स्ट्रक्चर पर घर लाश ले जाने के दिए देने के बदले दो लोगों को गिरवी रखा गया. देखिए रिपोर्ट.

स्ट्रेचर देने के बदले दो लोगों को ‘गिरवी’ रखने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, जब उन्होंने शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग की हो स्ट्रेचर काफी अनुनय विनय के बाद उपबल्ध कराया गया. इस दौरान अस्पताल कर्मियों ने हैरान करने वाली शर्त रख दी. आरोप है कि स्ट्रेचर देने के बदले मृतका के परिवार से दो लोगों को वहीं ‘गिरवी’ के रूप में रोक लिया गया. कहा गया कि स्ट्रेचर वापस मिलेगा तो आप चलें जाइएगा.

ठंड की रात में इस मजबूरी के बीच परिजन स्ट्रेचर पर महिला का शव रखकर घर की ओर निकल पड़े. जो वीडियो आप लोकल 18 पर देख सकते हैं. आरोप है कि मृतका के परिजन अस्पताल के नजदीकी इलाके के रहने की भी बात बताई इसके बावजूद अस्पताल के भीतर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई.

लोकल 18 पर सामने आई तस्वीरें, उठे बड़े सवाल
लोकल18 को मिली तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि किस तरह मृतका के परिजन स्ट्रेचर पर शव रखकर पैदल ही घर ले जा रहे हैं. कड़ाके की ठंड, रात का अंधेरा और व्यवस्था की उपेक्षा-इन सबने मिलकर इस घटना को और भी दर्दनाक बना दिया. ऐसा नहीं है कि यह कहानी पहली बार
नवादा से सामने आई है. News 18 ने इससे पहले भी कई बार स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर दिखा चुका है. इसके बाद सिविल सर्जन और डीएम लापरवाह बने हुए हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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अस्पताल में इंसानियत भी गिरवी! स्ट्रेचर के बदले दो लोग रखे, नहीं मिली एंबुलेंस

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