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पेड़ पर उगेगा पैसा! म्यूचुअल फंड किंग से जान लीजिए तरीका, कई पुश्तें बैठकर खाएंगी, फिर भी नहीं होगा खत्म

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म्यूचुअल फंड में कंपाउंडिंग को अक्सर ‘चमत्कार’ कहा जाता है, क्योंकि यह आपके पैसों को समय के साथ तेजी से बढ़ाता है. जब आप नियमित रूप से निवेश करते हैं तो केवल आपके मूल निवेश पर ही नहीं, बल्कि उस निवेश से बने मुनाफे पर भी ब्याज मिलने लगता है. यही ब्याज पर ब्याज आपके पैसे को कई गुना कर देता है. लंबे समय तक अनुशासन के साथ निवेश करने पर कंपाउंडिंग की ताकत और भी बढ़ जाती है. यही कारण है कि छोटी-सी राशि भी सालों में बड़ी रकम में बदल सकती है. कंपाउंडिंग असली जादू तब दिखाती है जब आप उसे समय देते हैं.

गजेंद्र कोठारी की कहानी यही सिखाती है. 2010 में जब वे 30 साल के थे, तब उन्होंने अपनी पहली SIP शुरू की थी. 10,000 रुपये महीना की एसआईपी. आज, उनकी मासिक SIP 41 लाख रुपये से अधिक है, और उनका पोर्टफोलियो 60 करोड़ रुपये का. इस पर हमने कल एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं. उसी स्टोरी को आगे बढ़ाते हुए हम आपको यह बता रहे हैं कि SIP और कंपाउंडिंग की शक्ति जब मिल जाते हैं तो सपने हकीकत में बदलने लगते हैं.

2004 में गजेंद्र कोठारी ने UTI म्यूचुअल फंड में नौकरी शुरू की. उस समय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री छोटी थी और इसके बारे में जागरूकता भई कम थी. लोग इसे जोखिम भरा निवेश मानते थे. तब कोठारी की सैलरी 30,000 रुपये थी, और मुंबई में किराया, शादी, और खर्चों के बाद बचत मुश्किल थी. उन्होंने लंदन में नौकरी की और फिर इंट्राडे में 50 लाख रुपये गंवा दिए. 50 लाख रुपये गंवाने के बाद उन्हें समझ में आया कि एसआईपी करते तो ज्यादा बेहतर होता. 2010 में उन्होंने 10,000 रुपये की SIP शुरू की. 5,000 रुपये स्मॉल कैप फंड में और 5,000 रुपये ELSS फंड में. उनका लॉजिक ये था कि “अगर मैं दूसरों को SIP की सलाह दे रहा हूं, तो पहले खुद करूं.”

उन्होंने इस SIP को 15 साल तक नहीं छुआ. न पैसा निकाला, न जोड़ा, न कोई इंस्टॉलमेंट मिस की. 15 साल में कुल 18 लाख निवेश अब 86 लाख रुपये का है. स्मॉल कैप फंड ने 21 प्रतिशत CAGR और ELSS ने 18 प्रतिशत CAGR दिया. गजेंद्र कहते हैं, “मेरी पहली 5,000 रुपये की इंस्टॉलमेंट आज 55 से 60,000 रुपये की है. 30 साल बाद यह 7 लाख तक पहुंच सकती है, यानी 140 गुना. यह कंपाउंडिंग का जादू है, जो समय और अनुशासन से काम करता है.

कंपाउंडिंग का गणित

गजेंद्र की कहानी में कंपाउंडिंग का गणित साफ दिखता है. उनकी 10,000 रुपये की SIP 15 साल में 86 लाख रुपये बन गई. इसका आधार है लंबी अवधि. उन्होंने 2008 क्रैश और 2020 COVID डाउनटर्न जैसे संकटों में भी SIP नहीं रोकी. 2020 में 10 साल बाद रिटर्न सिर्फ 7 फीसदी था, लेकिन धैर्य ने रंग दिखाया.

अगर आप 25 साल की उम्र में 10,000 रुपये मासिक SIP शुरू करें, और 15 फीसदी CAGR मानें, तो 30 साल बाद यह 6.6 करोड़ रुपये बन सकता है. अगर कोई निवेशक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे और सालाना रिटर्न (CAGR) 12 फीसदी भी मिले, तो 20 साल में उसके पास लगभग 49.96 लाख रुपये हो जाएंगे. यदि निवेश को 25 साल तक जारी रखा जाए, तो कुल राशि लगभग 94.88 लाख रुपये हो जाएगी. 20 के बाद के 5 सालों में रिटर्न लगभग दोगुना हो गया है. यही कंपाउंडिंग की ताकत है.

गजेंद्र कहते हैं, “SIP को ऑटोमेट करें. बाजार 80,000 हो या 85,000, दिमाग न लगाएं.” उनकी SIP 10,000 से 50,000, फिर 1 लाख, 2020 में 6-7 लाख, और अब 41 लाख तक पहुंची है.

चुनौतियां और धैर्य

SIP आसान लगती है, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव डराते हैं. गजेंद्र ने 2008 में 50 लाख रुपये FNO में गंवाए. यह गलती उन्हें सिखा गई कि सट्टेबाजी नहीं, अनुशासित निवेश काम करता है. 2020 में COVID क्रैश में उनकी SIP का रिटर्न गिरा, लेकिन उन्होंने रुके नहीं. बाजार साइक्लिकल हैं. अस्थिरता रिटर्न देती है. डरकर रुक गए, तो हार गए.

आम निवेशकों के लिए टिप्स

  • छोटे से शुरू करें: 5,000 या 10,000 रुपये से SIP शुरू करें. समय आपका दोस्त है.
  • ऑटोमेशन जरूरी: SIP को ऑटोमेट करें, ताकि बाजार की अस्थिरता में दिमाग न लगे.
  • लंबी अवधि: कम से कम 10-15 साल का लक्ष्य रखें. जितना लंबा, उतना बड़ा रिटर्न.
  • धैर्य: क्रैश में SIP न रोकें. बॉटम में ज्यादा डालें.
  • PPF से तुलना: PPF 7% देता है, SIP 12-18% दे सकती है. टैक्स बचाने के लिए लॉन्ग-टर्म रखें.
  • पोर्टफोलियो: 5-6 फंड्स से ज्यादा न लें. मिड/स्मॉल कैप में हाई रिटर्न की संभावना.
  • एक्टिव इनकम: पहले 15 साल आय बढ़ाएं, उसे SIP में डालें.

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