[ad_1]
Last Updated:
Poultry Farming: अगर कोई कम समय में ज्यादा कमाई करना चाहता है, तो टर्किश जैसी विदेशी नस्ल की मुर्गियों का पालन एक सुनहरा अवसर है. सिर्फ चार महीने में मुर्गी का वजन 6 से 7 किलो हो जाता है और अंडे भी अधिक दाम पर बिकते हैं. (रिपोर्ट:सावन पाटिल)

भारत में खेतीबाड़ी और पशुपालन लंबे समय से किसानों की आमदनी का मुख्य साधन रहा है. पहले किसान केवल देसी मुर्गियों या बॉयलर का पालन करते थे लेकिन अब समय बदल रहा है. आज मार्केट में विदेशी नस्ल की मुर्गियों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

इनमें से एक खास नस्ल है टर्किश मुर्गी, जिसके पालन से किसान बहुत कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. खंडवा निवासी किसान भावेश पटेल के अनुसार, यह विदेशी मुर्गी बाकी मुर्गियों से अलग है. इसकी ग्रोथ रेट बेहद तेज होती है. इसका मांस और अंडे दोनों की बाजार में जबरदस्त डिमांड है. ऐसे में जो किसान नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

टर्किश मुर्गी की खासियत<br />1. यह नस्ल सामान्य मुर्गियों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ती है.<br />2. मात्र चार महीने में इनका वजन 6 से 7 किलो तक पहुंच जाता है.<br />3. आम बॉयलर मुर्गी की तुलना में यह करीब तीन गुना भारी होती है.<br />4. इनके अंडे प्रोटीन से भरपूर और आकार में बड़े होते हैं.<br />5. इस नस्ल को पालने में ज्यादा खर्च नहीं आता क्योंकि यह तेजी से ग्रोथ करती है और जल्दी मार्केट में बिक जाती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

पालन का तरीका<br />1. सबसे पहले किसानों को स्वच्छ और हवादार शेड बनाना चाहिए, जिसमें पर्याप्त जगह हो.<br />2. इन मुर्गियों के लिए संतुलित आहार जरूरी है. मक्का, सोयाबीन, दाना और विटामिन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.<br />3. पानी की व्यवस्था साफ और ताजा होनी चाहिए.<br />4. समय-समय पर वैक्सीनेशन कराना जरूरी है ताकि बीमारियों से बचाव हो सके.<br />5. इनके पालन में तापमान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, खासकर शुरुआती दिनों में.

टर्किश मुर्गी का मांस हेल्दी और सॉफ्ट माना जाता है, जिसके कारण होटल, रेस्टोरेंट और बड़ी मंडियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इसके अंडे भी सामान्य अंडों की तुलना में ज्यादा दाम पर बिकते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में लोग अब हेल्दी और प्रोटीन युक्त भोजन की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में इस नस्ल की मांग भविष्य में और बढ़ेगी.

एक यूनिट में यदि किसान 100 चूजे पालते हैं, तो चार महीने में इनका वजन औसतन 6 किलो तक हो सकता है. एक मुर्गी बाजार में आसानी से 500 से 800 रुपये तक बिक सकती है. अंडों की बिक्री से भी अतिरिक्त आय हो सकती है. शुरुआती निवेश थोड़ा ज्यादा लग सकता है लेकिन कम समय में इसका फायदा दोगुना-तीन गुना तक मिल सकता है.

कम समय में ज्यादा वजन होने से जल्दी मुनाफा मिलता है. देसी मुर्गी और बॉयलर की तुलना में विदेशी नस्ल की कीमत ज्यादा मिलती है. इसका मांस और अंडे दोनों ही बिकने योग्य हैं, यानी दोहरा फायदा. छोटे स्तर से शुरू करके इसे बड़े स्तर तक ले जाया जा सकता है.

कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी नस्ल की मुर्गी का पालन करने से पहले किसानों को ट्रेनिंग लेनी चाहिए और मार्केट सर्वे भी करना चाहिए. अगर पास में होटल, रेस्टोरेंट या पोल्ट्री मंडी है, तो बिक्री में आसानी होगी. सही देखभाल और मार्केटिंग के साथ यह बिजनेस किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है.
[ad_2]
Source link