[ad_1]
Last Updated:
Jabalpur News: कहा जाता है कि अगर इंसान के पास धन दौलत की कमी न हो तो वह अपने हर शौक पूरी शिद्दत से पूरा करने की कोशिश करता है. फिर चाहे उसका शौक कितना भी अजीबोगरीब क्यों न हो. ऐसा ही शौक रखनेवाले हैं जबलपुर के अमरकांत पटेल. जिन्होंने 2 मंजिला मकान की छत पर 10 चक्का ट्रक चढ़ा दिया. खास बात ये कि ट्रक अब भी चालू हालत में है. पढ़ें अनोखी कहानी…(रिपोर्ट: आकाश निषाद)

अगर आप किसी ट्रक को मकान की छत पर खड़ा देखें तो क्या सोचेंगे? पहले तो आप हैरत में पड़ जाएंगे, उसके बाद मन में तरह-तरह के सवाल आएंगे. कुछ ऐसा ही होता है, जब जबलपुर-नागपुर हाईवे से गुजरते समय. यहां एक मकान की छत पर बड़ा सा ट्रक खड़ा है. दरअसल, ये ट्रक एक क्लिनर की मेहनत की निशानी है. ट्रक की सफाई से शुरू हुआ सफर, ट्रक मालिक तक पहुंच चुका है. इस सफर में क्लिनर से मालिक बने शख्स की ट्रक से दोस्ती हो गई. आज दोस्त ट्रक उनके दो मंजिला मकान की छत पर खड़ा है. खास बात ये कि ट्रक अब भी चालू हालत में है. पढ़ें अनोखी कहानी…

यह सफलता की कहानी जबलपुर के कारोबारी अमरकांत पटेल की है, जो दसवीं हो गए थे. फिर उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आगे क्या करें. इसके बाद उन्होंने ट्रक में क्लिनर का काम शुरू किया. घर में महज जमीन का टुकड़ा था. फेल होने के बाद घर के लोग डांटा करते थे. इसके बाद उन्होंने छोटी सी उम्र में परिवार से दूरी बनाकर, ट्रक में चलना सही समझा. ट्रक क्लिनर का काम शुरू किया.

इसी दौरान अमरकांत ने क्लीनर का काम करते हुए ट्रक को अपना दोस्त बना लिया. अमरकांत ट्रक की कंडक्टिंग भी कर लेते थे, लेकिन उन्होंने सोचा, क्यों न ट्रक ड्राइविंग करना भी सीखा जाए. फिर क्या था अमरकांत खाली सड़क में ट्रक भी चलाते और धीरे-धीरे ट्रक चलाना सीख लिया. लेकिन, जब अमरकांत ट्रक चलाना सीख गए, तब उनकी चाह और बढ़ गई. उन्होंने सोचा आखिर कब तक इसी तरह दूसरों के ट्रक चलाएंगे. फिर क्या था अमरकांत ने अपना खुद का ट्रक खरीदने की ठान ली.
Add News18 as
Preferred Source on Google

उन्होंने बताया लाखों रुपए का ट्रक लेना आसान बात नहीं थी. ट्रक को खरीदने के लिए बैंक गारंटी लगती, जो देने के लिए उनके पास नहीं थी. लेकिन, एक दोस्त के पिता को काफी मशक्कत के बाद तैयार किया. अपने जीवन का पहला ट्रक काफी मुश्किलों से सन 2011 में खरीद लिया. इसी 10 चक्का ट्रक से पूरा भारत नाप दिया, जहां ट्रक लेकर माल की सप्लाई किया करते और इसके बाद पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा. उन्होंने बताया कि जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन ट्रक ने सच्चे दोस्त की तरह साथ दिया.

अमरकांत बताते हैं ट्रक को खरीद कर धीरे-धीरे मेहनत करते रहे और जबलपुर-नागपुर हाईवे पर लगभग 10 हजार स्क्वायर फीट की जमीन 2017 में ली. दो मंजिला मकान बनाया. इसके पीछे कारखाना भी है, जिसमें ट्रक की बॉडी बनाने का काम भी शुरू किया. इसके बाद अब इसी सपनों के दो मंजिला घर में 30 हजार खर्च कर क्रेन की मदद से ट्रक को अपने सिर आंखों पर रखकर चढ़ा दिया, जिससे ट्रक की दोस्ती याद आ सके. यह ट्रक एक सच्चा दोस्त है, जो फैमिली मेंबर की तरह साथ है.

लिहाजा जब भी कोई राहगीर जबलपुर-नागपुर के हाईवे से निकलते हैं, तब दो मंजिला छत पर खड़े इस ट्रक को देखकर हैरान हो जाते हैं. गाड़ी तक रोक देते हैं. बहरहाल, अमरकांत का कहना है जिस दोस्त ने पूरे जीवन साथ दिया, अब उस दोस्त को रेस्ट देने का समय आ गया है. इसके चलते उन्होंने अपने दोस्त को बेचा नहीं, बल्कि ऐसे दोस्त दूसरों के लिए भी प्रेरणा बने, जिसको लेकर यह कदम उठाया है.
[ad_2]
Source link