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मां की आत्मा को शांति दिलाने वाली रस्म बन गई जानलेवा, बेटे को लगी खतरनाक बीमारी, डॉक्टरों ने किया बड़ा खुलासा…

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दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आज भी ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं. इनका उद्देश्य अक्सर अपनों की आत्मा को शांति देना और परिवार की रक्षा करना होता है. लेकिन कई बार जब यही रस्में स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ जाती हैं, तो वे गंभीर खतरा बन सकती हैं. चीन के पूर्वी हिस्से से सामने आई एक घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हर परंपरा को बिना सोचे-समझे निभाना सही है.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, चीन के झेजियांग प्रांत के एक दूरदराज इलाके में रहने वाले 60 साल से अधिक उम्र के एक व्यक्ति, जिनका नाम चेन बताया गया है, अपनी मां की मौत के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. उनकी मां की उम्र 86 साल थी और वह पूरी तरह स्वस्थ थीं. वह रोज खेतों में काम करती थीं और सक्रिय जीवन जी रही थीं. लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें तेज दस्त और उल्टियों की शिकायत हुई और कुछ ही समय में उनकी मौत हो गई. इस अचानक हुई मौत से चेन गहरे सदमे में चले गए.

गांव की परंपरा निभाने का फैसला
मां के निधन के बाद चेन ने अपने गांव की एक पुरानी परंपरा निभाने का फैसला किया. इस रस्म के तहत उन्होंने कई दिनों तक अपनी मां के बिस्तर पर सोना शुरू कर दिया. झेजियांग के कुछ इलाकों में इस परंपरा को “भूत का बिस्तर दफनाना” कहा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, किसी की मौत के बाद करीब 35 दिनों तक यह रस्म निभाई जाती है. माना जाता है कि इससे मृत आत्मा को शांति मिलती है और वह धीरे-धीरे परलोक की यात्रा पूरी करती है. इस परंपरा में हर सात दिन को एक खास चरण माना जाता है, जो आत्मा के अगले पड़ाव को दिखाता है.

क्यों खास है सात नंबर?
चीनी अंतिम संस्कार परंपराओं में सात नंबर को बेहद अहम माना जाता है. यह बदलाव, पूर्णता और नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से कई रस्में सात-सात दिनों के अंतराल पर की जाती हैं. यह परंपरा प्राचीन पूर्वज पूजा से भी जुड़ी हुई है. इसमें परिवार के सदस्य कागज के पैसे जलाते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और स्मृति समारोह आयोजित करते हैं, ताकि पूर्वज जीवित परिवार की रक्षा करें.

दसवें दिन बिगड़ी चेन की तबीयत
मां के बिस्तर पर सोने के दसवें दिन चेन को कमजोरी महसूस होने लगी. इसके बाद उन्हें मांसपेशियों में दर्द हुआ और फिर दस्त और उल्टियों की शिकायत शुरू हो गई. ये लक्षण बिल्कुल वैसे ही थे, जैसे उनकी मां को मौत से पहले हुए थे. तबीयत बिगड़ने पर चेन को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उन्हें टिक-बॉर्न वायरस संक्रमण हो गया है. यह वायरस बुखार, पेट की समस्या और गंभीर मामलों में इम्यून सिस्टम फेल होने और अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है.

कैसे फैला संक्रमण?
SCMP के अनुसार, डॉक्टरों का कहना है कि चेन की मां को यह संक्रमण टिक के काटने से हुआ था. बाद में जब चेन उनकी मौत के बाद उसी बिस्तर पर सोए, तो शरीर से जुड़े अवशेषों के संपर्क में आने से उन्हें भी वही वायरस लग गया. समय पर इलाज मिलने से चेन की हालत धीरे-धीरे बेहतर होने लगी. डॉक्टरों ने इस घटना को चेतावनी के तौर पर बताया कि परंपराओं का पालन करते समय स्वास्थ्य और स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

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