Headlines

Mysterious stone figures found in Dokra Panchayat Dhanbad

[ad_1]

धनबाद: धनबाद शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर दर घटना टाउनशिप के ठीक पीछे स्थित डोकरा पंचायत का एक छोटा सा गांव है. वो आज भी रहस्य और आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां मौजूद विशाल पत्थर की आकृतियां जिन्हें स्थानीय लोग राजा-रानी हाथी, घोड़ा, शेषनाग और ढोल नगाड़ों के रूप में देखते हैं. सदियों पुरानी एक लोककथा को जीवित रखे हुए हैं. गांव वालों का विश्वास है कि ये सभी किसी समय राजा-रानी की बारात का हिस्सा थे, जो एक श्राप के कारण पत्थर की मूर्तियों में बदल गए.

लोककथा क्या कहती है?
गांव की बहू गायत्री बताती हैं कि उन्होंने यह कहानी पिछले 17 वर्षों से अपनी सास-ससुर से सुनी है. लोकमान्यता के अनुसार, किसी कुलदेवी ने राजा-रानी की बारात को चेतावनी दी थी कि यदि सूर्योदय से पहले वर-वधू की विदाई नहीं हुई, तो पूरी बारात पत्थर में बदल जाएगी. कहा जाता है कि रात में विश्राम के बाद जैसे ही राजा-रानी अपने काफिले के साथ आगे बढ़े. तभी मुर्गे की बांग सुनाई दी और सूरज उग आया. उसी क्षण राजा-रानी, हाथी-घोड़े, शेषनाग और ढोल-नगाड़े सब पत्थर की आकृतियों में तब्दील हो गए.

स्थानीय लोगों का विश्वास
स्थानीय निवासी युधिष्ठिर कुमार बताते हैं कि वे पिछले 50 वर्षों से यहां रह रहे हैं. मजदूरी कर परिवार चलाने के बावजूद वे जब भी समय मिलता है, शेषनाग की पूजा करते हैं और इन्हीं पत्थरों के पास बैठते हैं. उनका कहना है कि कई बार उन्हें यहां ढोल-नगाड़ों जैसी आवाजें सुनाई देती हैं. आसपास के गांवों और बैलगाड़ी टाउनशिप में आने वाले लोग भी इस पत्थर की पहाड़ी को देखने जरूर आते हैं. बुजुर्गों का दावा है कि यह कहानी बिल्कुल सच्ची है और पीढ़ियों से चली आ रही है.

अमित बावरी, जो पिछले 15 वर्षों से बैलगाड़ी टाउनशिप में रह रहे हैं. कहते हैं कि वे भी इस कथा को बचपन से सुनते आए हैं. उनके अनुसार यह स्थान एक अजीब-सी शांति और रहस्य का एहसास कराता है. उन्होंने यह भी बताया कि वर्षों पहले 7-8 हाथियों ने मिलकर इन चट्टानों को हिलाने की कोशिश की थी, लेकिन वे अपनी जगह से टस से मस नहीं हुईं. इसी कारण लोग मानते हैं कि यहां किसी प्रकार का श्राप या दैवीय शक्ति जुड़ी हुई है.

सैलानियों की बढ़ती रुचि
आज यह स्थान केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि पिकनिक स्पॉट भी बनता जा रहा है. परिवार के साथ आने वाले लोग शेषनाग की पूजा-अर्चना करते हैं. राजा-रानी की मानी जाने वाली चट्टानों को देखते हैं और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं. स्थानीय लोगों की मांग है कि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए और एक छोटा मंदिर बनाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिल सके.

क्या है पत्थर की मूर्तियों की सच्चाई?
जहां एक ओर लोककथाएं और आस्था इस स्थान को रहस्यमय बनाती हैं. वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण कुछ और ही कहानी कहता है. भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह की आकृतियां प्राकृतिक क्षरण (erosion), हवा-पानी के प्रभाव और लाखों वर्षों की भू-प्रक्रियाओं से बनती हैं. चट्टानों का आकार कई बार मानव या जानवरों जैसा प्रतीत होता है. जिसे पैरेडोलिया कहा जाता है. यानी दिमाग का आकृतियों में परिचित रूप देख लेना. ढोल-नगाड़ों जैसी आवाजें भी हवा के बहाव, चट्टानों की संरचना और तापमान में बदलाव के कारण पैदा होने वाली प्राकृतिक ध्वनियां हो सकती हैं.

आस्था बनाम विज्ञान
डोकरा पंचायत का यह गांव आज आस्था और विज्ञान दोनों के बीच खड़ा नजर आता है. एक ओर सदियों पुरानी लोककथाएं हैं, जो लोगों की पहचान और विश्वास का हिस्सा बन चुकी हैं. दूसरी ओर वैज्ञानिक तथ्य हैं, जो इसे प्रकृति की अद्भुत रचना बताते हैं. सच चाहे जो भी हो, इतना तय है कि यह स्थान धनबाद जिले की सांस्कृतिक विरासत और लोकविश्वास का अनमोल उदाहरण है. स्थानीय लोग चाहते हैं कि इस विरासत को संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी राजा-रानी की इस रहस्यमयी कहानी और प्रकृति की अनोखी कारीगरी को एक साथ देख-समझ सकें.

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *