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Abhay Deol net worth: जब भी हम ‘देओल’ खानदान का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले सनी देओल का वो ढाई किलो का हाथ या फिर बॉबी देओल का स्वैग आता है. धर्मेंद्र जी ने जिस विरासत की शुरुआत की, उसे उनके बेटों ने बड़े पर्दे पर बखूबी निभाया. लेकिन इस मशहूर परिवार में एक ऐसा चेहरा भी है, जिसने कभी भी ‘मसाला’ फिल्मों के पीछे भागना पसंद नहीं किया. उसने न तो शर्ट उतारकर बॉडी दिखाई और न ही चीख-चीखकर डायलॉग बोले. लोग कहते थे कि ये लड़का तो देओल खानदान का होकर भी फ्लॉप है. पर आज जब आंकड़े सामने आए हैं, तो पूरी दुनिया दंग रह गई है. खामोशी से अपना काम करने वाला ये शख्स आज अपने दोनों बड़े भाइयों, सनी और बॉबी देओल से भी ज्यादा अमीर बन चुका है. हम बात कर रहे हैं अभय देओल की, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के अपनी किस्मत की ऐसी कहानी लिखी, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.
अभय का बचपन मुंबई के एक ऐसे माहौल में बीता, जहां हर तरफ सिनेमा की बातें होती थीं. उनके पिता अजीत सिंह देओल फिल्म मेकर थे और ताया धर्मेंद्र तो खुद में एक इंस्टीट्यूट थे. लेकिन अभय की आंखों में वो चमक नहीं दिखी, जो एक सुपरस्टार बनने के लिए चाहिए होती है. वो बचपन से ही थोड़े अलग थे. उन्हें भीड़ पसंद नहीं थी, वो खामोश रहते थे और अक्सर अपने ही खयालों में खोए रहते थे. उन्हें चमक-धमक वाली लाइफस्टाइल से ज्यादा सुकून और कला में दिलचस्पी थी. जब वो बड़े हुए और एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने की बारी आई, तो उनके सामने दो रास्ते थे. एक वो रास्ता जिस पर चलकर सनी और बॉबी सुपरस्टार बन चुके थे, यानी मार-धाड़ वाली फिल्में और ढेर सारा पैसा. दूसरा रास्ता था वो, जो उनकी रूह को सुकून दे, भले ही उसमें रिस्क बहुत ज्यादा हो.
हो गए थे डिप्रेशन का शिकार, फिर यूं उबरे
अभय ने दूसरा रास्ता चुना. साल 2005 में उनकी पहली फिल्म आई ‘सोचा ना था’. फिल्म बहुत ही प्यारी थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वो जादू नहीं दिखा पाई, जिसकी एक देओल से उम्मीद की जाती थी. इसके बाद एक के बाद एक कई फिल्में आईं, लेकिन सफलता उनसे कोसों दूर थी. लोग कहने लगे थे कि अभय का करियर खत्म हो गया है. उनके पास पैसे खत्म हो रहे थे, काम मिल नहीं रहा था और इंडस्ट्री के बड़े लोग उन्हें सीरियसली नहीं ले रहे थे.
एक वक्त ऐसा भी आया जब वो डिप्रेशन का शिकार हो गए और न्यूयॉर्क चले गए. वहां उन्होंने अपना वक्त पेंटिंग करने, वेल्डिंग सीखने और खुद को खोजने में बिताया. वो एक ऐसी स्थिति में थे, जहां से वापस आना नामुमकिन सा लग रहा था.
बनाई अपनी प्रोडक्शन कंपनी, खोला रेस्टोरेंट
लेकिन अभय ने हार मानने की जगह अपनी सोच ही बदल दी. उन्होंने समझ लिया था कि सिर्फ एक्टिंग के भरोसे वो अपनी पहचान और दौलत नहीं बना पाएंगे. न्यूयॉर्क से लौटने के बाद उन्होंने एक बड़ा रिस्क लिया. उन्होंने तय किया कि वो अपनी पसंद की फिल्में खुद बनाएंगे. उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘फॉरबिडन फिल्म्स’ शुरू की. इसके साथ ही उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा. उन्हें खाने-पीने का शौक था, तो उन्होंने ‘द फैटी काउ’ नाम की एक रेस्टोरेंट चैन में निवेश किया. ये वो पल था जब एक एक्टर के अंदर का बिजनेसमैन जाग चुका था. उन्होंने समझ लिया था कि अगर आप सिस्टम को नहीं बदल सकते, तो सिस्टम का हिस्सा बनकर अपने नियम बनाओ.
अभय का बिजनेस मॉडल बहुत ही सीधा लेकिन स्मार्ट था. उन्होंने सारा पैसा एक ही जगह लगाने के बजाय उसे अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया. उन्होंने मुंबई के पॉश इलाकों में प्रॉपर्टी खरीदी, पंजाब में अपनी जमीन पर काम किया और गोवा में एक शानदार ईको-फ्रेंडली घर बनाया, जिसकी कीमत आज करोड़ों में है. फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने खुद को ‘मिडल ऑफ द रोड’ सिनेमा का चेहरा बनाया. वो ‘देव डी’ और ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ जैसी फिल्मों के जरिए युवाओं के आइकन बन गए. उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आने की आहट बहुत पहले ही पहचान ली थी और अपना कंटेंट उसी हिसाब से तैयार करना शुरू कर दिया था.
सनी और बॉबी से कितनी ज्यादा है अभय की नेटवर्थ?
तरक्की की राह पर चलते हुए अभय ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनके रेस्टोरेंट बिजनेस ने उन्हें वो आर्थिक मजबूती दी, जिसकी कमी वो शुरुआती दिनों में महसूस करते थे. जहां सनी और बॉबी देओल सिर्फ फिल्मों और विज्ञापन से कमाई कर रहे थे, वहीं अभय ने रेस्टोरेंट्स, रियल एस्टेट और प्रोडक्शन हाउस के जरिए कमाई के कई रास्ते खोल लिए थे.
आज आलम ये है कि भले ही अभय की फिल्में कभी कभार आती हों, लेकिन उनकी सालाना कमाई करोड़ों में है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनकी नेट वर्थ करीब 400 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जो उनके चचेरे भाइयों की तुलना में कहीं ज्यादा है. अलग-अलग मीडियो रिपोर्ट्स के हिसाब से सनी देओल की नेटवर्थ 130 करोड़ रुपये आंकी जाती है, जबकि बॉबी देओल की नेटवर्थ 60-70 करोड़ रुपये है.
गोवा वाला ग्लास हाउस चर्चा में
आज अभय देओल अपनी शर्तों पर जिंदगी जी रहे हैं. उनका गोवा वाला ‘ग्लास हाउस’ चर्चा का विषय रहता है, जो उनके हटकर सोचने के अंदाज को बयां करता है. अभय ने इसे ‘बिना खिड़कियों वाला घर’ कहा है. यहां पारंपरिक खिड़कियों की जगह फर्श से छत तक बड़े कांच के स्लाइडिंग दरवाजे हैं, जिन्हें खोलने पर पूरा घर एक खुले बरामदे जैसा महसूस होता है.
घर का डिजाइन ऐसा है कि जंगल और हरियाली घर का हिस्सा महसूस होते हैं. यह 1 एकड़ में फैला हुआ है. छतें काफी ऊंची हैं और फर्श पर काले ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है. घर में बहुत कम साज-सज्जा है, जिसमें मिट्टी के बर्तन, पेंटिंग्स और एक शानदार आउटडोर स्विमिंग पूल शामिल है. घर में आधुनिक किचन के साथ-साथ एक पर्सनल डीजे सेटअप भी है, जो अभय के म्यूजिक के प्रति शौक को दर्शाता है.
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