Headlines

पुराने घर की चल रही थी मरम्मत, तभी दीवार के पीछे छुपा मिला 100 साल पुराना लेटर, पढ़कर उड़े मालिक के होश!

[ad_1]

Last Updated:

अमेरिका के वायोमिंग राज्य में एक घर की मरम्मत चल रही थी. तभी लोगों को दीवारों के अंदर छिपा एक 100 साल पुराना लेटर मिला. यह कहानी है कैस्पर शहर में रहने वाले कर्टिस स्मिथ की, जिन्होंने अपने घर के रिनोवेशन के दौरान एक ऐसा चीज का अनुभव किया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.

पुराने घर की चल रही थी मरम्मत, तभी दीवार के पीछे छुपा मिला 100 साल पुराना लेटरघर की मरम्मत के दौरान एक चिट्ठी मिली. (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)

अक्सर लोगों के हाथ कोई पुराना सामान लग जाता है जो गुजरे वक्त की याद दिला देता है. अमेरिका में एक शख्स के साथ भी ऐसा ही हुआ जो अपने घर की मरम्मत करवा रहा था जब उसे दीवार में एक लेटर मिला. ये लेटर 100 साल पुराना था. जब उसने लेटर को पढ़ा तो उसे काफी हैरानी हुई. फिर उसने वो किया जो कोई सोच भी नहीं सकता था. उसने लेटर को उसके सही हकदार तक पहुंचा दिया.

अमेरिका के वायोमिंग राज्य में एक घर की मरम्मत चल रही थी. तभी लोगों को दीवारों के अंदर छिपा एक 100 साल पुराना लेटर मिला. यह कहानी है कैस्पर शहर में रहने वाले कर्टिस स्मिथ की, जिन्होंने अपने घर के रिनोवेशन के दौरान एक ऐसा चीज का अनुभव किया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. स्मिथ का घर साल 1917 में बना था. इसमें एक ‘जैक एंड जिल’ स्टाइल बाथरूम था, यानी दो बेडरूम के बीच बना साझा बाथरूम, जो पुराने घरों में आम होता है. स्मिथ ने न्यूजवीक को बताया कि उन्होंने इस व्यवस्था को बदलने का फैसला किया. योजना यह थी कि बेडरूम की अलमारी हटाकर वहां एक छोटा-सा हॉलवे बनाया जाए, जिससे बाथरूम का स्ट्रक्चर बदला जा सके. मरम्मत की शुरुआत अलमारी तोड़ने से हुई. प्लास्टर और लकड़ी के ढांचे हटाए जा रहे थे. स्मिथ टूटे हुए मलबे को हटाकर एक जगह जमा कर रहे थे, तभी उन्हें मलबे के नीचे एक नीले रंग का लिफाफा दिखा.

ये चिट्ठी 100 साल पुरानी थी जिसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. (फोटो: Reddit/u/Ghosttowncs)

शख्स को मिला अनजान लेटर
स्मिथ बताते हैं कि उस पल उन्हें हैरानी और खुशी, दोनों का एहसास हुआ. दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले उन्होंने अपने परिवार से मज़ाक में कहा था, “काश मुझे यहां कोई पुराना पत्र मिल जाए.” काम रोककर स्मिथ ने लिफाफा खोला और पत्र पढ़ना शुरू किया. यह पत्र सितंबर 1917 का था और इसे कॉर्नेलिस पैट्रिक शिया नाम के व्यक्ति को भेजा गया था, जिन्हें पत्र में ‘कॉन शिया’ कहा गया था. शिया मूल रूप से आयरलैंड के बैंट्री इलाके से थे और बाद में वायोमिंग आकर बस गए थे. वह पेशे से भेड़ पालक थे. पत्र की भाषा बेहद सरल और भावनात्मक थी. यह शिया की बहन ने आयरलैंड से भेजा था. इसमें अमेरिका भेजे गए उपहार के लिए धन्यवाद दिया गया था और बैंट्री में हो रही घटनाओं का ज़िक्र था. पत्र में शिया और उनकी पत्नी मैरी के बच्चे का भी उल्लेख था, जो शायद उनका बेटा जॉन था, जिसका जन्म 1914 में हुआ था. पत्र में परिवार के लिए अच्छे स्वास्थ्य और शुभकामनाएं लिखी गई थीं, जो इसे और भी मार्मिक बना देती हैं.

असली हकदारों तक पहुंचाया लिफाफा
इस खोज से उत्साहित होकर स्मिथ ने गूगल पर कॉन शिया के बारे में जानकारी तलाशनी शुरू की. उन्हें पता चला कि अमेरिका आने के बाद शिया ने अच्छी सफलता हासिल की थी और कैस्पर समुदाय के शुरुआती वर्षों में वह एक सम्मानित व्यक्ति थे. इसके बाद कहानी ने और दिलचस्प मोड़ लिया. स्मिथ ने पत्र की तस्वीरें अपने फ्लिकर अकाउंट पर साझा कीं. कुछ समय बाद शिया के एक दूर के रिश्तेदार ने उनसे संपर्क किया. दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई और रिश्तेदार ने शिया और उनके परिवार से जुड़ी कई पुरानी तस्वीरें और जानकारियां साझा कीं. दिसंबर आते-आते स्मिथ ने तय किया कि वह इस पत्र के साथ कुछ खास करेंगे. उन्होंने शिया के एक जीवित रिश्तेदार का पता ढूंढा और वह पत्र बोस्टन भेज दिया. इस तरह करीब 100 साल बाद यह पत्र अपने असली हकदारों तक पहुंच गया. स्मिथ ने इस पूरे अनुभव को रेडिट पर भी साझा किया. स्मिथ आज भी पूरी तरह नहीं जानते कि यह पत्र दीवार के भीतर कैसे पहुंचा. उनका मानना है कि हो सकता है इसे जानबूझकर एक ‘टाइम कैप्सूल’ की तरह छोड़ा गया हो, या फिर निर्माण के दौरान गलती से यह वहीं फंस गया हो.

About the Author

Ashutosh Asthana

आशुतोष अस्थाना न्यूज़18 हिन्दी वेबसाइट के ऑफबीट सेक्शन चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. यहां वो दुनिया की अजीबोगरीब खबरें, अनोखे फैक्ट्स और सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग न्यूज़ को कवर करते हैं. आशुतोष को डिजिटल मी…और पढ़ें

homeajab-gajab

पुराने घर की चल रही थी मरम्मत, तभी दीवार के पीछे छुपा मिला 100 साल पुराना लेटर

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *