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5000 साल पुरानी दुर्लभ नस्ल… दिल्ली में राजाओं वाली जिंदगी जी रहा ये विदेशी कुत्ता, महीने का खर्च है 150000 रुपये

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नई दिल्ली : कहते हैं शौक बड़ी चीज है. इस बात को सच कर दिखाया है दिल्ली के रहने वाले एक शख्स ने, जिन्होंने ऐसी दुर्लभ डॉग ब्रीड यानी कुत्ते को पाल रखा है, जिसके पार्लर और रखरखाव पर हर महीने डेढ़ लाख रुपए का खर्चा आता है. इतना पैसा आपका पूरा परिवार मिलकर एक साल में खर्च करता होगा. उतना सिर्फ इसकी लाइफस्टाइल पर ही खर्च हो रहा है. इसके मालिक कहते हैं कि अपने बच्चों की तरह वह इसकी देखभाल करते हैं. जितना खर्चा एक नवजात शिशु पर आता है. उतना खर्चा वह इस पर करते हैं.

राजा-महाराजाओं की जिंदगी जी रहा है ये कुत्ता

उन्होंने कहा कि जब शौक पाला है, तो फिर पैसा नहीं देखते हैं. इन्हें देखकर आपको यही लगेगा कि किसी राजा महाराजाओं से कम इसकी जिंदगी नहीं है. इतना आपका पूरा परिवार भी एक साल में नहीं खर्च कर पाएगा, जितना ये डॉग एक महीने में अपने ऊपर खर्च करवाता हैं. यह अपनी मर्जी का मालिक है. इसे गले में पट्टा बांधकर टहलाने की जरूरत नहीं है. इसे सिर्फ अपने गार्डन में एक-दो घंटे के लिए छोड़ देते हैं. यह खुद ही एक्सरसाइज कर लेता है. इसके मालिक ने बताया कि इसे गुस्सा जल्दी आ जाता है. इसलिए इसकी ट्रेनिंग बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि इसका अभी वजन 70 किलोग्राम है और लंबाई लगभग 4 फीट है.

विदेशी नस्ल है ये सेंट्रल एशिया शेफर्ड

इसके मालिक दिल्ली में चल रहे पेटफेड में लेकर इसे आए हुए थे. जो कोई इसे देख रहा था. वो इसे देखकर दंग रह जा रहा था. क्योंकि देखने में यह कुत्ता बेहद खूंखार नजर आता है, लेकिन यह बेवजह किसी पर भौंकता नहीं है.

इसके मालिक ने लोकल 18 से बताया कि उनका नाम दीतेश है और उनके कुत्ते का नाम सिंबा है. जो कि एक सेंट्रल एशिया शेफर्ड है. इसे गार्ड डॉग कहते हैं, यानि सुरक्षा के लिहाज से सबसे बेस्ट डॉग ब्रीड, लेकिन यह भारत का नहीं है. बल्कि कजाखस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिजस्तान जैसे देशों में पाया जाता है. भारत के उत्तराखंड में लोग इसे रखते हैं और दिल्ली एनसीआर के माहौल में भी यह रह लेता है.

डेढ़ लाख रुपए का है हर महीने खर्चा

इसके मालिक दीतेश ने बताया कि वह अपने बच्चों की तरह इसे पालते हैं. इसीलिए खर्चे के बारे में नहीं सोचते हैं. यूं तो इसकी कीमत 200000 रुपए से ज्यादा है, लेकिन हर महीने इसके रख रखाव जैसे ग्रूमिंग यानी पार्लर, टॉयज, हेल्थ और खान-पान समेत दूसरे तरह के कई खर्चे हैं, जिन पर डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा खर्चा हर महीने हो जाता है. खास बात यह है कि यह डॉग फूड खाता है और कभी-कभी चिकन, चावल और सब्जी भी खा लेता है. दिन में दो बार यह खाना खाता है और खास तौर पर सर्दियों में सवा किलो ग्राम खाना इसका हो जाता है.

5000 साल पुरानी है नस्ल

सेंट्रल एशिया शेफर्ड के इतिहास की बात करें, तो यह नस्ल  4,000-5000 साल से भी पुरानी नस्ल है. विदेशों में इस डॉग का इस्तेमाल भेड़-बकरियों और इंसानों की रखवाली के लिए किया जाता था. इसे प्राकृतिक चयन से विकसित किया गया, न कि लैब-ब्रीडिंग से यानी आज तक इसकी क्रॉस ब्रीडिंग नहीं हो सकी है.  इसकी ऊंचाई नर 65-78 सेमी और मादा 60-70 सेमी है. सेंट्रल एशिया शेफर्डकी चौड़ी छाती, मज़बूत हड्डियां, मोटी गर्दन और स्वभाव में यह वफादार, बहादुर, नेचुरल गार्ड, शांत लेकिन जरूरत पड़ने पर बेहद आक्रामक होते हैं. इनकी उम्र लगभग 10-13 साल होती है.

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