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ब्रह्मांड में असंख्य तारे और सौरमंडल मौजूद हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को भी कुछ भी नहीं पता है. ऐसे में अक्सर साइंटिस्ट जब दूसरे ग्रहों को लेकर खुलासा करते हैं, तो उनके बारे में और ज्यादा जानने की इच्छा होती है. हमारे सौरमंडल में भी कई ऐसे ग्रह मौजूद हैं, जिनसे जुड़ी जानकारी जुटाने में वैज्ञानिक लगे हुए हैं. हम इंसानों के लिए अंतरिक्ष हमेशा से ही रहस्यों का पिटारा रहा है और मानव सभ्यता ने हमेशा यह जानने की कोशिश की है कि क्या ब्रह्मांड में हम अकेले हैं? एलियंस और दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश में वैज्ञानिक दशकों से जुटे हैं, लेकिन हाल ही में एक वैज्ञानिक के दावे ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है. बकिंघम यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च फेलो बैरी डिग्रेगोरियो (Barry DiGregorio) ने एक ऐसा विवादास्पद दावा किया है जिसने नासा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
डिग्रेगोरियो का मानना है कि नासा द्वारा मंगल ग्रह से ली गई पत्थरों की तस्वीरें वास्तव में साधारण चट्टानें नहीं, बल्कि ‘नर्म शरीर वाले जीवों (Soft-Bodied Creatures)’ के जीवाश्म हैं, जो कभी लाल ग्रह पर विचरण करते थे. उनके अनुसार, ये तस्वीरें मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन का सबसे बड़ा प्रमाण हैं, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय और अंतरिक्ष एजेंसियां इसे स्वीकार करने में हिचकिचा रही हैं. बता दें कि यह साल एलियंस की खबरों के लिहाज से काफी हलचल भरा रहा है. इससे पहले ’31/Atlas’ को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी, जिसे हार्वर्ड के एक वैज्ञानिक सहित कई लोग एलियन स्पेसशिप मान रहे थे, हालांकि बाद में नासा ने स्पष्ट किया कि वह महज एक धूमकेतु था. इसके अलावा ‘द एज ऑफ डिस्क्लोजर’ नामक डॉक्यूमेंट्री ने भी सनसनी फैलाई थी, जिसमें कई सैन्य अधिकारियों ने एलियन ऑब्जेक्ट्स देखने का दावा किया था. लेकिन डिग्रेगोरियो का दावा इन सबसे अलग और अधिक गहरा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नासा के डेटा और उनकी मंशा पर सवाल उठाता है.
नील आर्मस्ट्रॉन्ग (बाएं) के साथ बैरी डिग्रेगोरियो.
जिन तस्वीरों को डिग्रेगोरियो एलियंस का जीवाश्म बता रहे हैं, उन तस्वीरों को नासा ने जारी किया था. NASA का कहना है कि पत्थरों की ये अजीब आकृतियां केवल ‘क्रिस्टल ग्रोथ’ का परिणाम हैं. लेकिन डिग्रेगोरियो ने नासा पर सच्चाई को कवर-अप करने का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि नासा 2030 के दशक में मंगल पर मानव भेजने की अपनी योजना के कारण इस जानकारी को दुनिया से छिपा रहा है. डिग्रेगोरियो का कहना है कि इन तस्वीरों में जो आकृतियां दिख रही हैं, वैसी पहले कभी मंगल पर नहीं देखी गई थीं और नासा ने जिस तेजी से उस इलाके को छोड़कर रोवर को आगे बढ़ाया, वह बेहद संदेहास्पद है. डिग्रेगोरियो के अनुसार, यदि इन आकृतियों को ध्यान से देखा जाए, तो ये ‘स्टिक’ या छड़ियों जैसी संरचनाएं मेजबान चट्टान (host rock) में विलीन होती नजर आती हैं, जो कि ट्रेस जीवाश्मों (trace fossils) की एक प्रमुख विशेषता है.
उन्होंने नासा मुख्यालय पर आरोप लगाया कि उन्होंने रोवर को डेटा इकट्ठा करने से पहले ही अगले बिंदु पर जाने का आदेश दे दिया, जबकि वह स्थान (गैल क्रेटर) अरबों वर्षों तक झीलों का घर रहा होगा. डिग्रेगोरियो का तर्क है कि क्रिस्टल कभी भी इस तरह से शाखाओं में ना बंटते हैं और ना ही मुड़ते हैं, जैसा कि इन तस्वीरों में दिख रहा है. उनके अनुसार, यह संरचना पृथ्वी के ‘ऑर्डोविशियन काल’ (Ordovician period) के दौरान पाए जाने वाले जीवों के समान हो सकती है. वैज्ञानिक का सबसे चौंकाने वाला तर्क यह है कि नासा को मंगल की मिट्टी में जीवित सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी के बारे में पहले से पता है. उनका मानना है कि अगर नासा अभी जीवन की खोज की घोषणा कर देता है, तो जनता और करदाता यह सवाल उठाएंगे कि जब जीवन मिल ही गया है, तो वहां 2.5 बिलियन डॉलर का प्रोब भेजने और अरबों रुपये खर्च करने की क्या जरूरत है? उनके अनुसार, नासा अपने भविष्य के मिशनों की फंडिंग सुरक्षित रखने के लिए इस जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर रहा है.
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