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बिहार में तो सब मुमकिन है…!! मास्टर साहब को मिल गई ‘प्रेग्नेंट लीव’, जानें क्या है पूरा माजरा

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जमुई:- शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाएं भी काम करती हैं. शादी के बाद जब महिलाएं मां बनती हैं, तब उन्हें कई प्रकार की परेशानियों से गुजरना पड़ता है और इस दौरान होने वाले परेशानियों को देखते हुए महिला शिक्षिकाओं के लिए मातृत्व अवकाश की व्यवस्था की गई है, जिसमें शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश दिया जाता है. प्रसव के दौरान या गर्भावस्था के दौरान शिक्षिका को इस अवकाश की सुविधा दी जाती है. लेकिन जरा सोचिए क्या हो, अगर शिक्षा विभाग एक पुरुष शिक्षक को प्रसूता मान ले और उसे मातृत्व अवकाश दे. इसे पढ़कर आप हैरान जरूर हो रहे होंगे, लेकिन यह कोई कहानी नहीं, बल्कि बिल्कुल सच है. मामला जमुई जिले में सामने आया है, जहां शिक्षा विभाग ने एक पुरुष शिक्षक को महिला शिक्षिकाओं को प्रसव के बाद दिए जाने वाले मातृत्व अवकाश की स्वीकृति प्रदान कर दी.

जमुई में सामने आया ये हैरान कर देने वाला मामला
यह मामला जमुई जिले में सामने आया है, जहां जमुई जिले के सोनो प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय ढोंढ़री में पदस्थापित शिक्षक मो. जहीर को शिक्षा विभाग ने मातृत्व अवकाश दे दिया. हैरानी की बात तो यह है कि शिक्षक ने अपने लिए मेडिकल लीव मांगा था, लेकिन जब उन्हें छुट्टी प्रदान की गई, तब उन्हें मातृत्व अवकाश दे दिया गया. जिसके बाद अब शिक्षा विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है. दरअसल बीते नवंबर माह में शिक्षक मो. जहीर ने अपनी तबीयत खराब होने के बाद शिक्षा विभाग को आवेदन लिखकर मेडिकल लीव की मांग की थी और उन्हें छुट्टी दे भी दी गई. लेकिन जब बाद में ई-शिक्षा कोष पोर्टल की रिपोर्ट सामने आई, तब उसमें यह देखा गया कि शिक्षक मो. जहीर को मेडिकल लीव की जगह मैटरनिटी लीव दिया गया है. शिक्षक को 18 से लेकर 27 नवंबर तक मातृत्व अवकाश दिया गया है.

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शिक्षा विभाग की जमकर हो रही है किरकिरी
शिक्षा विभाग लगातार अपने कारनामों को लेकर चर्चा में रहता है. कभी शिक्षक फर्जी तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कर देते हैं, तो कभी शिक्षा विभाग शिक्षकों से एक कदम आगे निकलकर पुरुष शिक्षक को ही मातृत्व अवकाश दे देता है. विद्यालय के प्रधान शिक्षक शंकर रजक ने कहा कि शिक्षक ने मेडिकल लीव के लिए आवेदन दिया था, जिसके बाद उन्होंने आवेदन को स्वीकृत कर विभाग के वरीय पदाधिकारी के पास भेज दिया था.

वहीं पूरे मामले पर शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) पारस कुमार ने कहा कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर छुट्टी के लिए आवेदन किए जाने में मेडिकल लीव या स्पेशल लीव का कोई ऑप्शन नहीं है. जब भी मेडिकल लीव के लिए आवेदन दिया जाता है, तो वह स्वतः ही मैटरनिटी लीव हो जाता है. उन्होंने कहा कि टेक्निकल गलती के कारण ऐसा हुआ है. लेकिन शिक्षा विभाग की एक तकनीकी भूल के कारण अब शिक्षा विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है.

Tags: Bihar education, Bihar News, Bihar Teacher, Local18

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