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जसप्रीत बुमराह; भारत की राष्ट्रीय संपदा, गेंदबाजी के सचिन तेंदुलकर, कोहिनूर! और भी ना जाने क्या-क्या हैं…

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मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से: जसप्रीत बुमराह- भारत की राष्ट्रीय संपदा. जसप्रीत बुमराह- कोहिनूर. जसप्रीत बुमराह-मैल्कम मार्शल की तरह संपूर्ण तेज़ गेंदबाज.जसप्रीत बुमराह-गेंदबाज़ी का सचिन तेंदुलकर. पिछले कुछ साल में तमाम क्रिकेट जानकार और दुनिया भर के फैंस बुमराह की महानता को बयां करने के लिए विशेषण के लिए ठीक वैसे ही तरसते दिख रहे हैं जिस तरह से उनकी गेंदबाजी के ख़िलाफ असहाय दिग्गज बल्लेबाज़. अपने 44वें टेस्ट में 200 विकेट के क्लब में शामिल होने वाले बुमराह दरअसल ना भूतो ना भविष्यति (ना अतीत में ऐसा कोई था और ना शायद भविष्य में ऐसा कोई हो) वाले क्लब में भी शुमार हो चुके हैं. 20 से कम की औसत से 200 विकेट टेस्ट क्रिकेट में तो महान मार्शल ने भी पूरे नहीं किए थे. बुमराह से पहले इतने बेहतरीन औसत से 200 विकेट के क्लब में सामिल होने वाले गेंदबाज़ वेस्टइंडीज़ के ही जोएल गार्नर थे. अब आप उस पीढ़ी के हों जिन्होंने बचपन में मार्शल, गार्नर, होल्डिंग जैसे गेंदबाज़ों के हैरतअंगेज कमाल को सुनते हुए क्रिकेट को सुना, देखा और समझा हो उन्हें इस बात पर काफी फख्र हो रहा होगा कि जिस ऑस्ट्रेलिया ने खुद दुनिया को डेनिस लिली, जैफ थॉमसन, ग्लेन मैक्ग्रा, जैसन गिलेस्पी और ब्रेट ली जैसे सर्वकालीन महान तेज़ गेंदबाज़ दिए हैं, उन्हें भी ऐसा आभास हो रहा है कि शायद बुमराह जैसा खौफनाक गेंदबाज उन्होंने भी नहीं देखा है.

कपिल का रिकॉर्ड तोड़ा, अब जॉनसन निशाने पर
अगर आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो 1991-92 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर महान कपिल देव ने 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 25 विकेट झटके थे और वो रिकॉर्ड अब तक बरकरार था. बुमराह ने तो कपिल देव का रिकॉर्ड ना सिर्फ मौजूदा सीरीज़ के चौथे टेस्ट में ही तोड़ दिया बल्कि वो अब एक नए रिकॉर्ड बनाने के करीब भी पहुंचते दिख रहे हैं. बुमराह 2013-14 की एशेज में मिचेल जॉनसन के 5 मैचों की सीरीज़ में 37 विकेट के रिकॉर्ड को तोड़ने की औपचारिकता भी शायद सिडनी में पूरी कर दें. पिछले 100 साल में ऑस्ट्रेलियाई ज़मीं पर किसी एक गेंदबाज़ का 5 मैचों की सीरीज़ में वो सबसे बेहतरीन खेल था. इत्तेफाक से उस सीरीज़ में जॉनसन के खौफ़ से मेहमान टीम इंग्लैंड लगातार भयभीत दिख रही थी औऱ इस बार बुमराह के आगे मेज़बान पूरी तरह से पस्त होते दिखाई दे रहे हैं.

जीत के सपने बुमराह के भरोसे
अगर भारत मौजूदा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज में जीत के सपने देख रहा है या फिर बिना सीरीज हारे लौटने के बारे में सोच भी सकता है तो इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ बुमराह जैसी शख्सियत का अपने असाधारण लय में होना है. बुमराह ने ना सिर्फ गेंद के दम पर बल्कि कप्तान के तौर पर भी पहले टेस्ट में ज़बरदस्त छाप छोड़ी थी और टीम इंडिया को 1-0 की अप्रत्याशित बढ़त भी दिलाई थी. उसी के चलते टीम इंडिया जब मेलबर्न पहुंची तो सीरीज़ में हर नतीजे संभव दिख रहे थे.

बुमराह को वो इज्जत क्यों नहीं, जो बैटर्स को है?
इस लेखक को याद है कैसे 2022 के कैरेबियाई दौरे पर एंटिगा में जब हमारी मुलाकात एक और महान तेज़ गेंदबाज़ एंडी रॉबर्ट्स से हुई तो उन्होंने बिना पूछे हमसे कहा था कि आप लोग हमेशा अपने देश में बल्लेबाज़ों की पूजा करते हैं, बुमराह को वो सम्मान क्यों नहीं देते? रॉबर्ट्स की इस बात पर मैं ठिठक कर ये सोचने को मजबूर हो गया था कि वाकई में भारतीय फैंस ने बुमराह जैसे जीनियस की वैसी सराहना या तारीफ नहीं की है जिसके वो हकदार थे?

गेंदबाजी कोच का काम भी करते हैं बुमराह
टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज़ी कोच पारस महाम्ब्रे ने हाल ही में इस लेखक को ये बताया था कि कैसे बुमराह जैसे टीममैन की मौजूदगी टीम के हेड कोच या फिर गेंदबाजी कोच का काम आसान कर देती है. जितनी सहजता से बुमराह युवा गेंदबाज़ों का मार्गदर्शन करते हैं या फिर उन्हें नए गुर सिखाते हैं वो काम टीम का कोई साथी खिलाड़ी ना करके कोच करता है. बुमराह इस टीम के अनाधिकारिक तौर पर गेंदबाजी कोच की भी भूमिका निभाते हैं!

इंटरव्यू क्यों नहीं देते जसप्रीत बुमराह 
इस साल की शुरुआत में साउथ अफ्रीका दौरे पर बुमराह से हमारी मुलाकात प्रिटोरिया में होती है. टीम को अभ्यास के लिए जाना था लेकिन बारिश के चलते होटल लॉबी में रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ समेत टीम के अहम खिलाड़ी टीम बस का इंतजार कर रहे थे. मौके के देखते हुए हमने बुमराह से ये सवाल पूछ ही डाला कि आखिर वो इंटरव्यू क्यों नहीं करते हैं. इस अनौपचारिक सवाल पर मुस्कराते हुए उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा क्या नया मेरे पास कहने को है. मेरा काम गेंदबाज़ी करना है और वो मैं करता हूं. जब मैंने उन्हें ये कहा कि दुनिया ये भी जानना चाहती है कि आप किसकी तरह बनना चाहते थे, आपके हीरो कौन थे… इस पर रोहित शर्मा ने तपाक से मज़ाकिया अंदाज़ में जवाब दिया- अरे भाई वो किसी दूसरे की तरह क्यों बनना चाहेगा? वो बुमराह है भाई बुमराह! हर कोई आज बुमराह की तरह गेंदबाज़ बनना चाहता है.

बूम-बूम बुमराह… लाल गेंद हो या सफेद
भारतीय कप्तान ने भले ही वो बात मज़ाकिया अंदाज़ में कही हो लेकिन ये बात आज ही नहीं बल्कि आने वाले हर साल में पूरी गंभीरता से कही जाएगी. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ही नहीं बल्कि दुनिया में बुमराह जैसा संपूर्ण गेंदबाज़ ना पहले आया था और शायद आगे भी नहीं दिखे. इससे पहले कि आप इस वाक्य पर अचंभा दिखाये तो आपको याद दिलाना चाहूंगा कि बुमराह ना सिर्फ लाल गेंद बल्कि सफेद गेंद से वन-डे क्रिकेट और टी20 क्रिकेट में भी उतने ही प्रभावशाली रहे हैं. आधुनिक महान गेंदबाज़ों में से जिन्होंने 200 टेस्ट विकेट के सफर में अटूट छाप छोड़ी उनमें से वकार यूनिस और शॉन पॉलक तो वनडे क्रिकेट में उम्दा थे. और यही बात साउथ अफ्रीका के दो और दिग्गज गेंदबाज़ डेल स्टेन और कगीसो रबाडा के बारे में भी कही जा सकती है जो टी20 में बुमराह के करीब भी नहीं पहुंचे हैं. और चलते-चलते आपको हम ये भी बता दें कि बुमराह की महानता का आकलन करते हुए हमने उनके आईपीएल के कमाल का जिक्र ही नहीं किया जिस टूर्नामेंट में बल्लेबाज़ों के लिए बेहद मददगार पिचों और नियम के बावजूद बुमराह का जलवा बरकरार रखता है.

ये दौर जसप्रीत बुमराह का है और ये पीढ़ी भाग्यशाली है जो इस जीनियस के कमाल को अपने सामने जादू बिखेरते दिख रही है. सर्वकालीन महानता का आकलन करते हुए वकार यूनिस -वसीम अकरम के दामन में (गेंद ख़राब करके फायदा उठाने वाली बात करके) दाग ढूंढ़ना शायद सही नहीं और जेम्स एडंरसन का भी ये कसूर नहीं कि वो इंग्लैंड में असाधारण रहे हैं. डेनिस लिली की महानता को कमतर आंकने के लिए हमेशा एशिया में उनके साधारण रिकॉर्ड का उदाहरण दिया गया. लेकिन, बुमराह के साथ ख़ास बात ये है कि मैलकम मार्शल की तरह वो संपूर्णता के प्रतीक है. एक बात और कि लाल गेंद के अलावा वो सफेद गेंद के दोनों फॉर्मेट में भी उतने ही प्रभावशाली रहते हैं और आईपीएल का जिक्र तो हम कर ही नहीं रहे हैं.

Tags: Border Gavaskar Trophy, India vs Australia, Jasprit Bumrah

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