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छतरपुर. जिले में एक ऐसा पौधा पाया जाता है जिसके उपयोग के बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. लेकिन जिले के रहने वाले शिवराम जो सालों से इस पौधे की टहनियों से डलिया बना रहे हैं. इस पौधे की बनी डलिया मजबूत और टिकाऊ होती है. साथ ही सस्ते दामों में यह खरीदने को मिल जाता है.
शिवराम लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि पिछले 40 सालों से हम गुलचटार पौधे से मजबूत डलिया बना रहे हैं. छोटे से लेकर बड़े साइज के टिपार हम बनाते हैं. यहां की क्षेत्रीय भाषा में इसे डलिया, टिपार या टिपरा, गुलइया और टोकरी भी बोलते हैं.
आसानी से मिल जाते हैं पौधे
शिवराम बताते हैं कि डलिया बनाने के लिए यहां आसानी से यह पौधा मिल जाता है. गुलचटार से लेकर दूसरे पौधों के भी टिपार बन जाते हैं. सहेरु, ऐंठ और अरहर की खड़ियों से भी डलिया बन जाते हैं.
ग्रामीण इलाकों में रहती हैं ज्यादा डिमांड
शिवराम बताते हैं कि छतरपुर जिले में इन टिपारों की मांग बहुत रहती है. खासकर, ग्रामीण इलाकों में इनकी मांग ज्यादा रहती है. किसान परिवार सबसे ज्यादा ये डलिया खरीदते हैं. क्योंकि अनाज से लेकर भूसा तक भरने में ये काम आते हैं. साथ ही शादी जैसे कार्यक्रमों में पूड़ी-लड्डू रखने के लिए ये टिपार काम आते हैं.
बाजार में इस भाव में बिकते हैं
शिवराम बताते हैं कि इन डलियों का भाव इनकी साइज के अनुसार रहता है. हालांकि, बड़े साइज के ही ज्यादातर डलिया बनाते हैं. डलियों के साइज के अनुसार इनका रेट 100 रुपए,150 रुपए ,200 रुपए और 250 रुपए तक रखते हैं.
Tags: Agriculture, Chhatarpur news, Kisan, Local18, Madhya pradesh news
FIRST PUBLISHED : January 7, 2025, 23:37 IST
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