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Lala Ramswaroop Calendar has reached not only India but also abroad In 91 years Know story behind indias oldest Calendar

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Lala Ramswaroop Calendar 2025: भारत का 91 साल पुराना कैलेंडर आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक और विदेशों में भी प्रचलित है. यह कैलेंडर न केवल हिंदू त्योहारों और पंचांग की जानकारी देता है, बल्कि आजादी के समय भी इसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा था….और पढ़ें

जबलपुर. नए साल में कुछ खरीदा जाए या ना जाए, लेकिन एक ऐसी चीज है, जिसे हर घर में खरीदा जाता है. जी हां हम बात कर रहे हैं, कैलेंडर की. दरअसल हर घर में नए साल में कैलेंडर खरीदा ही जाता है, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं. जबलपुर के उस कैलेंडर की, जिसने कश्मीर से कन्याकुमारी तक ही नहीं विदेशों तक अपनी पहुंच बनाई है.

लाला रामस्वरूप रामनारायण एंड संस मतलब 71, 72 और 73 भारत का इकलौता एक ऐसा कैलेंडर है, जो सबसे पुराना है. 1934 मतलब 91 साल पुराना… आजादी के पहले का यह कैलेंडर अब भारत के कोने-कोने तक पहुंच रहा है, जिसकी बागडोर अब जबलपुर की तीसरी पीढ़ी संभाल रही है, जिनसे लोकल 18 ने खास बातचीत की….

पूरे शहरवासी पूछा करते थे तिथि और मुहूर्त
लाला रामस्वरूप रामनारायण एंड संस के संपादक प्रहलाद अग्रवाल ने बताया कि मैं दूसरी पीढ़ी हूं, जबकि मेरा बेटा अब बागडोर संभाल रहा है, जो तीसरी पीढ़ी है. उन्होंने बताया कि 1934 से पंचांग की शुरुआत हुई थी. अंग्रेजों के शासन के दौरान अंग्रेजी कैलेंडर में हिंदी त्योहारों का कोई भी जिक्र नहीं होता था, जबकि हिंदी पंचांग संस्कृत की भाषा में चलते थे. आम आदमियों के लिए ऐसे कैलेंडर को पढ़ने में कठिनाई जाती थी. लिहाजा पिता राम नारायण से बार-बार लोग पूछने आते थे. पिकअप कौन सा त्यौहार और व्रत है. पिताजी अंग्रेजी कैलेंडर में सारी जानकारी अंकित कर रखा करते थे, जिसके चलते ही कैलेंडर प्रिंट करने की शुरुआत की थी.

500 कैलेंडर से हुई थी शुरुआत अब 40 लाख पहुंची 
उन्होंने बताया सन 1934 में पिताजी ने 500 कैलेंडर से शुरुआत की थी, जिसमें अंग्रेजी कैलेंडर में हिंदू त्यौहार को अंकित किया गया था. वहीं अब 91 साल बाद करीब 40 लाख कैलेंडर प्रिंट किए जाते हैं, जो भारत के प्रत्येक राज्य मतलब कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं विदेशों तक में पंचांग पसंद किए जाते हैं. उन्होंने बताया पंचांग में तिथि और राशि के अलावा कैलेंडर के दोनों ओर महत्वपूर्ण जानकारी समावेशित की जाती है, जिसमें सभी सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर महत्वपूर्ण नंबर होते हैं.

2026 के कैलेंडर को प्रिंट करना शुरू 
उन्होंने बताया कैलेंडर की जानकारी जुटाना में पूरा 1 साल लगता है. लिहाजा अगले वर्ष 2026 के कैलेंडर की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया गया है, क्योंकि त्यौहार से लेकर राशिफल और तिथियां की सटीक जानकारी कैलेंडर के माध्यम से दी जाती है, जहां ज्योतिष के माध्यम से कैलेंडर में कई भविष्यवाणी होती हैं. इसके बाद बड़ी संख्या में कैलेंडर को प्रिंट करना होता है. इसलिए कैलेंडर को प्रिंट करने में करीब 1 वर्ष का समय लग जाता है. उन्होंने बताया कैलेंडर को प्रिंट कर हम अपनी पीढ़ी की परंपरा को आगे बढ़ने का भी काम कर रहे हैं.

आजादी के दौरान कैलेंडर ने बिगुल फूंका
उन्होंने बताया आजादी के पहले कैलेंडर ने बिगुल फूंकने का काम किया था, जहां लाला रामस्वरूप रामनारायण पंचांग ने अपने कैलेंडर में महापुरुषों के द्वारा दिए गए क्रांति कारी नारे को भी प्रिंट किया था, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया था और कहीं ना कहीं पंचाग के माध्यम से आजादी में भी अपनी भूमिका निभाई थी. उन्होंने लोकल 18 से अपील कि यदि किसी समाज का त्यौहार या उत्सव कैलेंडर में समावेशित कराना है. तब निःशुल्क इसकी सटीक जानकारी दी जा सकती है. जिसे अगले अंक में समाहित किया जाएगा.

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