[ad_1]

Last Updated:
ये मशीन बिनी बिजली के चलती है. उनकी इस जुगाड़ के लोग कायल हो गए हैं. मो.रोजाद्दीन को उस समय की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है.
पूर्वी चंपारण. जुगाड़ से भी जिंदगी बदलती है. बिहार के लोग जुगाड़ के लिए प्रसिद्ध भी होते हैं. मोतिहारी के रोजाद्दीन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. कुकर से कॉफी मशीन बनाने की जुगाड़ कर उन्होंने न केवल पैसा और सम्मान कमाया बल्कि हजारों लोगों के रोजगार का बजट भी कम कर दिया. मो.रोज़ाद्दीन को भूतपूर्व राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.
70 वर्षीय मो.रोजाद्दीन मूल रूप से वेल्डिंग का काम करते हैं. मधुबन छावनी चौक मोतिहारी में उनकी दुकान है. लोकल 18 से बातचीत में रोजाद्दीन बताते हैं हम वेल्डिंग का काम करते हैं जैसे बैनर का फ्रेम बनाना, वाहनों का वेल्डिंग इत्यादि. इस उम्र में भी काम करने में कोई दिक्कत नहीं है. कुकर से जुगाड़ करके कॉफी मशीन बनाने के कारण ही 15 साल प्रयास करने के बाद 2009 में दिल्ली गए वहां उस समय की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. पुरस्कार में 35,000 रुपये और प्रशस्ति पत्र इत्यादि मिला था.
क्या है जुगाड़ वाली कॉफी मशीन?
रोजाद्दीन के अनुसार शादी विवाह में जाते थे तो देखते थे कि कॉफी बनाने की मशीन है वो बिजली से चलती है. यही देखकर हमने कोशिश की, और कुकर में किया गया प्रयोग सफल हो गया. इसके बाद लोग ऑर्डर देने लगे और हम तब से कुकर से कॉफी मशीन बना रहे हैं. कुकर के ढक्कन में छेद कर के उसके अंदर से एक पाइप अटैच करते है और एक नल लगते हैं जिसे एक पेचकस के सहारे चलाया जाता है.
जुगाड़ ने व्यापारियों का बजट कर दिया कम
रोजाद्दीन की इस जुगाड़ ने व्यापारियों के निवेश में लगने वाले बजट को बहुत कम कर दिया. कोई व्यक्ति कॉफी का स्टॉल लगाना चाहता है और अगर वह मशीन खरीदेगा तो खर्च बहुत ज्यादा हो जाएगा. वहीं जुगाड़ वाली कॉफी मशीन तैयार करने में 2500 से 3000 का कुल खर्च आएगा. 800 रुपये मजदूरी लगेगी, 1500 रुपए कुकर में खर्च होंगे. वह बताते हैं कि जब सीजन होता है तो अच्छी कमाई हो जाती है. 50 से ज्यादा भी ऑर्डर आ जाते हैं. इस बार डिमांड कम है. इसलिए ऑर्डर मिलने पर ही बना रहें, पहले से बनाकर नहीं रखते हैं.
Motihari,Purba Champaran,Bihar
January 13, 2025, 15:42 IST
[ad_2]
Source link