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West Bengal particular mithai: पूर्वी बर्दवान के स्वाता गांव में 200 साल पुराना मेला लगता है, जहां मिठाइयों की खरीदारी का अनोखा उत्सव देखने को मिलता है. यह मेला हर साल हजारों लोगों को आकर्षित करता है.

पूर्वी बर्दवान जिले के आउशग्राम ब्लॉक के स्वाता गांव में हर साल एक अनोखा मेला लगता है, जिसे लोग ‘बोम्मन साहब का मेला’ भी कहते हैं. यह मेला 200 वर्षों से भी अधिक पुराना है और यहां मिठाइयों की खरीदारी का उत्सव देखा जाता है. मेला समिति के अनुसार, यह मेला पौष संक्रांति के दिन शुरू होता है और छह दिनों तक चलता है. इस दौरान हजारों लोग पीर बाबा के स्थान पर दर्शन करने के साथ-साथ मिठाइयों की खरीदारी करने आते हैं.
मिठाइयों पर लाखों का कारोबार
इस मेले की सबसे खास बात यह है कि यहां लगभग 25 लाख रुपये की मिठाइयां बिकती हैं. मेला समिति के सचिव अब्दुल अलीम ने बताया कि मिठाई कारोबारी इस मेले में आने से काफी खुश रहते हैं क्योंकि यहां मिठाइयों की बिक्री हर साल बढ़ती जा रही है. लोग बाल्टी, बर्तन और मिट्टी के बड़े बर्तन भर-भर कर मिठाइयां खरीदते हैं.
हर कोई मिठाइयां खरीदकर ही लौटता है
यह परंपरा है कि कोई भी व्यक्ति इस मेले से खाली हाथ नहीं लौटता. मिठाइयों के दीवाने यहां विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का आनंद लेने आते हैं. रसगुल्ला, बड़ा लंगचा, और अन्य पारंपरिक मिठाइयां हर दुकान पर उपलब्ध होती हैं. ग्राहक टुकड़ों में मिठाइयां खरीदते हैं और परिवार व दोस्तों के लिए घर ले जाते हैं.
हर साल मिठाइयों के लिए उमड़ती है भीड़
मेले में आए एक ग्राहक, शेख मोइउद्दीन, ने बताया, “मैं हर साल इस मेले में मिठाइयां खरीदने आता हूं. इस बार मैंने 1500 रुपये की मिठाई खरीदी है और अभी और खरीदने का इरादा है.” मिठाई विक्रेता रतन दास ने बताया कि पहले मिठाइयां किलो के हिसाब से बिकती थीं, लेकिन अब टुकड़ों में बिकती हैं.
छह दिन चलता है मेला, मिठाइयों का खास आकर्षण
यह मेला छह दिनों तक चलता है और पहले चार दिन सबसे ज्यादा भीड़ रहती है. लोग बर्तन, लोटे और बाल्टियां लेकर मिठाइयां खरीदने आते हैं. मेला न केवल मिठाइयों के लिए, बल्कि ग्रामीण परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए भी प्रसिद्ध है.
January 16, 2025, 16:38 IST
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