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Durable Brooms: छत्रसाल नगर, छतरपुर में बनी खजूर की झाड़ू टिकाऊ, सस्ती और प्रभावी सफाई के लिए एक आदर्श विकल्प है. यह न केवल कारीगरों की मेहनत को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कम साधनों में भी बेहतरीन उत्पाद बनाए जा सकते…और पढ़ें
झाड़ू बनाते छोटू
छतरपुर. अगर आप मार्केट से झाड़ू खरीदते हैं लेकिन आपका यह झाड़ू कुछ ही दिनों में टूट जाता है तो आप जिले के छत्रसाल नगर में पहुंचकर एक ऐसा झाड़ू ले सकते हैं जो टिकाऊ भी होता है और मार्केट से सस्ता भी मिल जाता है.
दरअसल, छतरपुर के छत्रसाल नगर में बच्चा जेल के नजदीक खजूर से झाड़ू बनाने का काम होता है. जिसकी वज़ह से यह सस्ते दामों में मिल जाता है. यहीं रहने वाले छोटू जो पिछले 4-5 सालों से झाड़ू बनाने का काम करते हैं. इनके झाड़ू की खासियत है कि यह टिकाऊ है और मार्केट से सस्ती होती है.
इतनी मेहनत से बनाए जाती हैं ये झाड़ू
छोटू लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि हमारा धंधा ही झाड़ू बनाने का है. छोटू बताते हैं कि सबसे पहले बहुत दूर से खजूर के पत्ते लाते हैं. इसके बाद पत्तियों को काटते हैं फिर तोड़ते -फाड़ते हैं. इसके बाद तार से झाड़ू को कसते हैं. फिर पाइप लगाने का काम होता है. इसके बाद आख़िरी काम छिलाई करने का होता है. फिर जाकर मार्केट में बेचने लायक तैयार होती है. झाड़ू बनाने के काम बहुत मेहनत लगती है.
मार्केट से सस्ते दामों में मिलती है
छोटू बताते हैं कि हमारे यहां एक झाड़ू खुल्ले में 20 रुपए की जाती है. वहीं थोक में 17 से 18 रुपए की बेचते हैं. मार्केट में बेचने के लिए लोग यहीं से झाड़ू ले जाते हैं. अगर मार्केट में खुल्ले में एक झाड़ू के रेट की बात करें तो 25 रुपए की मिलती है.
गांव -शहर के लोगों की जरूरत के हिसाब से झाड़ू बनाते हैं
छोटू बताते हैं कि झाड़ू गांव और शहर में रहने वाले लोगों की जरूरत के हिसाब से बनाते हैं. हालांकि, आजकल ज्यादातर लोगों के घर पक्के हो गए हैं, टाइल्स-पत्थर भी लगे होते हैं. इसलिए झाड़ू भी ऐसी ही बनाते हैं कि कितना भी चिकना पत्थर हो और कितना भी बारीक कचड़ा हो, हमारे इस झाड़ू से साफ हो जाता है.
Chhatarpur,Madhya Pradesh
January 18, 2025, 14:12 IST
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