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Small Business Idea: महंगाई के दौर में आटा चक्की खोलना अब छोटा मगर पक्का बिज़नेस बनता जा रहा है. कम लागत में शुरू होने वाला यह कारोबार गांव और शहर दोनों में रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा है. जानें सब…(रिपोर्ट:शिवांक द्विवेदी/सतना)

आज के समय में जब महंगाई हर घर की रसोई पर असर डाल रही है. ऐसे में खुद की आटा चक्की खोलना छोटा मगर पक्का व्यवसायिक कदम साबित हो सकता है. यह बिजनेस कम पूंजी से शुरू होकर गांव और शहर दोनों जगह स्थाई कमाई का जरिया बन रहा है.

किसान और छोटे उद्यमी अब छोटे स्तर पर भी अपनी आटा चक्की खोलकर परिवार की आमदनी बढ़ा रहे हैं. रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा होने के कारण इस व्यवसाय की डिमांड कभी कम नहीं होती.

उद्यानिकी विभाग से सुधा पटेल ने बताया, आटा चक्की खोलने के लिए किसानों और पात्र हितग्राहियों को सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है. PMFME योजना के तहत आवेदन कर लाभ उठाया जा सकता है. इसके लिए MyScheme पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
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इस योजना के तहत आटा चक्की लगाने पर पात्र परियोजना लागत का 35% अनुदान दिया जाता है. अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये प्रति यूनिट तक तय की गई है. आवेदन करने वाले को एकल सूक्ष्म उद्यम, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) या किसी अन्य पात्र समूह के तहत पंजीकरण करना होता है.

योजना में सिर्फ वित्तीय मदद ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, विपणन और ब्रांडिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं. कोई भी पुरुष या महिला मात्र 50 हजार रुपये से छोटी आटा चक्की खोल सकता है. वहीं 1 से 2 लाख रुपये तक निवेश करने वालों को भी अच्छा मुनाफा मिल सकता है.

इस योजना की खासियत है कि छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले लोग भी समय के साथ अपने कारोबार को विस्तार दे सकते हैं. अलग से अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं.

इस योजना में सिर्फ आटा चक्की ही नहीं, बल्कि बेकरी प्रोडक्ट, नमकीन बनाना, मिठाई, केक, अचार, राइस मिल, पेस्ट्री यूनिट जैसे अन्य कई विकल्प भी शामिल हैं. उद्यमी इनमें से किसी भी यूनिट की स्थापना कर सकते हैं और कम लागत में अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं.

योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ावा देना है. आटा चक्की जैसे छोटे लेकिन स्थायी व्यवसाय से न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी. महंगाई और बेरोजगारी के दौर में यह योजना युवाओं और किसानों को आर्थिक मजबूती देने का एक सुनहरा मौका है.
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