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Dilli Abhi Door Hai Ka Matlab: दिल्ली अभी दूर है का अर्थ कि मंजिल अभी दूर है. अगर कोई किसी कार्य को करने का सोच रहा है मगर उस कार्य को अंजाम देने में वक्त है, तब ये कहा जाता है, कि दिल्ली अभी दूर है. पर दिल्ली ही शहर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
दिल्ली अभी दूर है किसने कहा था? (फोटो: Canva)भारत में कई ऐसी कहावतें और मुहावरे कहे जाते हैं जो सैकड़ों साल पुराने हैं मगर लोगों को उनका सही मतलब नहीं पता है. आज भी ये वाक्य इस्तेमाल किए जाते हैं, चलन में हैं, पर उसके पीछे की क्या कहानी है, उसे जानने की कोशिश कोई नहीं करता है. ऐसा ही एक वाक्य है, दिल्ली अभी दूर है. आपने अक्सर ये वाक्य घरों में इस्तेमाल होते सुना होगा. नेताओं और सेलिब्रिटीज को इंटरव्यू में कहते सुना होगा. पर क्या आपने कभी इस वाक्य का असली अर्थ जानने की कोशिश की? चलिए आज हम आपको बता देते हैं.
दिल्ली अभी दूर है का अर्थ कि मंजिल अभी दूर है. अगर कोई किसी कार्य को करने का सोच रहा है मगर उस कार्य को अंजाम देने में वक्त है, तब ये कहा जाता है, कि दिल्ली अभी दूर है. पर दिल्ली ही शहर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? दरअसल, इसकी कहानी दिल्ली के ही एक सुल्तान से जुड़ी है जो तुगलक साम्राज्य के थे. सुल्तान का नाम था गयासुद्दीन तुगलक.
हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह…जिन्होंने कहा था- ‘हनोज दिल्ली दूर अस्त’ (फोटो: Canva)
निजामुद्दीन औलिया ने कहा था- ‘हनोज दिल्ली दूर अस्त’
हुआ यूं कि गयासुद्दीन तुगलक के एक दरबारी थे, अमीर खुसरो जो भारत के बेहद लोकप्रिय कवि और शायर माने जाते हैं. वो दिल्ली में रहने वाले हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे. तुगलक को खुसरो से बहुत लगाव था मगर वो निजामुद्दीन औलिया को पसंद नहीं करते थे. उन्हें लगता था कि उनकी लोकप्रियता ज्यादा है और उनके पास जो लोग बैठते हैं, वो बादशाह के खिलाफ साजिश रचते हैं. एक बार गयासुद्दीन तुगलक कहीं से दिल्ली लौट रहे थे जब उन्होंने खुसरो को संदेश भेजवाया कि जब तक वो दिल्ली पहुंचें, तब तक निजामुद्दीन औलिया दिल्ली से चले जाएं. नहीं तो वो उन्हें सबक सिखाएंगे. ये सुनकर खुसरो को दुख हुआ मगर फिर भी वो ये बात बताने अपने गुरु के पास पहुंचे. जब निजामुद्दीन औलिया ने ये बात सुनी तो कहा- ‘हनोज दिल्ली दूर अस्त’ यानी दिल्ली अभी दूर है.
लौटते वक्त हो गई मौत, दिल्ली नहीं पहुंच पाए गयासुद्दीन तुगलक
जब वो लौट रहे थे तो उनके रास्ते में एक मंडप बनाया गया जहां तुगलक की जीत का जश्न मनाना था. पर वो लकड़ी का बना मंडप गिर गया और उसके नीचे दबकर तुगलक की मौत हो गई. माना जाता है कि इसके पीछे उनके बड़े बेटे मुहम्मद बिन तुगलक की साजिश थी. इस तरह निजामुद्दीन औलिया की बात सच साबित हो गई और ये कहावत- दिल्ली अभी दूर है सैकड़ों साल बाद भी लोगों ने याद रखी.
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आशुतोष अस्थाना न्यूज़18 हिन्दी वेबसाइट के ऑफबीट सेक्शन चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. यहां वो दुनिया की अजीबोगरीब खबरें, अनोखे फैक्ट्स और सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग न्यूज़ को कवर करते हैं. आशुतोष को डिजिटल मी…और पढ़ें
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