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Engine Man Unique House: आखिर कौन हैं इंजन मैन? जिनका घर नहीं रेलवे स्टेशन से कम…हर वक्त आती है ट्रेन की आवाज, बिछा है एक KM लंबा ट्रैक

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Agency:NEWS18DELHI

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Engine Man Unique House: छोटे-बड़े कई घर आपने देखे होंगे. लेकिन इंजन मैन ने तो घर को रेलवे स्टेशन बना दिया है. लोग उनका आशियाना देख हैरान रह जाते हैं.

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संजय

संजय कुमार 

हाइलाइट्स

  • संजय कुमार का घर मिनी रेलवे स्टेशन जैसा है.
  • संजय ने 1970 के स्टीम इंजन की हूबहू कॉपी बनाई.
  • संजय की ट्रेनें और इंजन राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं.

Engine Man Unique House: अपने घर को लोग कई तरीकों से सजाते हैं. लेकिन रेलवे स्टेशन वाला घर. ये तो गजब हो गया. इस अनोखे घर में रेलवे ट्रैक बिछा हुआ है और हर वक्त ट्रेन की सीटी बजने की आवाज आती है. आस पड़ोस के लोगों ने इस घर का नाम मिनी रेलवे स्टेशन रख दिया है. यह घर है संजय कुमार है, जोकि इंजन मैन के नाम से मशहूर हैं.

इन्हें लोग लोको पायलट भी कहते हैं. संजय कुमार ने दिल्ली के भारत मंडपम में अपनी ट्रेन, इंजन और ट्रक की प्रदर्शनी लगाई थी. लोग देखते ही दंग रह गए थे. संजय कुमार से उनके घर पर पहुंच कर जब हमने खास बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं.

रेलवे स्टेशन वाला अनोखा घर
अब वो लंबे वक्त से गुड़गांव और दिल्ली में रहते हैं. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की हुई है. उन्होंने बताया कि वह स्टीम इंजन बनाते हैं. अब तक दो इंजन और ट्रेन बन चुके हैं. चार अभी प्रोसेस में हैं और दो पूरी तरह से तैयार है. पहली बार उन्होंने 15 अगस्त पर अपनी सोसाइटी में कई किलोमीटर का ट्रैक बिछाया और इस ट्रेन को चलाया. बड़े, बुजुर्ग और बच्चे सभी इस पर बैठे थे. सबको यह बेहद पसंद आया था. तब से इनका हौसला जागा और फिर भारत मंडपम में गए जहां पर इनको राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली.

कमरे में बंद रहकर तैयार किया इंजन 
संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने 1970 के स्टीम इंजन की कॉपी तैयार की है. 1979 में स्टीम इंजन चलन से बाहर हो गए थे. इस 1970 के स्टीम इंजन की हूबहू कॉपी इन्होंने तैयार की है. यह उनकी पहली ट्रेन थी. जिसे साढ़े तीन साल तक एक कमरे में बंद रहकर वह बना रहे थे. यह 272 वजन का स्टीम लोकोमोटिव है. 25 की रफ्तार है. 40 लोग इस पर बैठ सकते हैं. इसकी सीटी की आवाज इतनी तेज है, जो लगभग एक किलोमीटर तक जाती है. इसके हर एक पार्ट को उन्होंने खुद ही तैयार किया था. क्योंकि वह मैकेनिकल इंजीनियर हैं और कुछ पार्ट को इन्होंने धीमे-धीमे करके खरीदा था.

पूरे एशिया में नहीं मिलेगी ऐसी ट्रेन 
संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने कार रोलिंग ट्रेन भी तैयार की है, जिस पर एक बार में 10 से ज्यादा लोग बैठ सकते हैं. बहुत ही आरामदायक गाड़ी होती है और वह पार्क प्रदर्शनी या सोसाइटी में कई किलोमीटर का ट्रैक बिछा कर उस पर लोगों को बैठा कर चलाते हैं. लोगों को यह बहुत पसंद आता है. उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के एक म्यूजियम में अब इस तरह के इंजन और ट्रेन को सुरक्षित करके रखा गया है. इस ट्रेन का वजन लगभग 35 किलोग्राम है.  अगर भारत सरकार और भारतीय रेलवे चाहे तो वह इन्हीं ट्रेन और इंजन का एक खूबसूरत पार्क बनाकर दे सकते हैं, जिसे देखने के लिए ना सिर्फ देश बल्कि विदेश तक से लोग आएंगे.

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हिमालय दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन और ट्रेन विश्व में सबसे खूबसूरत मानी जाती है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. इस हिमालय दार्जिलिंग की हूबहू कॉपी संजय कुमार तैयार कर रहे हैं, जो मार्च में बनकर तैयार हो जाएगी. इसमें भी स्टीम लोकोमोटिव लगाए गए हैं. यह गैस और कोयला दोनों से चलेगी. पूरे हिंदुस्तान या एशिया में अब फिलहाल यह लोकोमोटिव नहीं है, क्योंकि हिमालय दार्जिलिंग ट्रेन 135 साल से इन्हीं इंजन पर चल रही है. इन्होंने जो ट्रेन बनाई है उसका वजन 750 किलोग्राम है.

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