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Explainer: इस बार डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट अलग और वास्तविक क्यों है

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रुपया इस बार डॉलर के मुकाबले गिरकर ऐतिहासिक निचले स्तर को पार कर गया. ये 90.05 से 90.14 तक गिरा. इससे पहले 2 दिसंबर को यह 89.96 पर बंद हुआ था. 3 दिसंबर को 9 पैसे की गिरावट के साथ 90.05 पर ट्रेडिंग शुरू हुई. आखिर इस बार रुपए के गिरने को कहीं ज्यादा गंभीर और वास्तविक क्यों माना जा रहा है.

रुपये की यह गिरावट अमेरिकी टैरिफ नीतियों, विदेशी निवेशकों की भारी निकासी और मजबूत डॉलर की मांग से उपजी है. इस साल जुलाई से विदेशी वित्तीय निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹1.03 लाख करोड़ से अधिक की निकासी कर ली है. तेल और सोने जैसे आयात पर डॉलर स्टॉकिंग बढ़ने से भी रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है.

सवाल – रुपए की ये गिरावट ऐतिहासिक तो है लेकिन इसे क्यों गंभीर माना जा रहा है?

यह गिरावट अब “गंभीर और वास्तविक” कही जा रही है, क्योंकि रुपया 2025 में 5.16% तक कमजोर हो चुका है. 1 जनवरी के 85.70 से बढ़कर 90 के पार पहुंच गया. ये अमेरिका के 50 फीसदी तक के उच्च टैरिफ के निर्यात से प्रभावित हो रहा है. आयात महंगे हो रहा. रुपए का मौजूदा प्रदर्शन इसे एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शुमार कर रहा है. वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक जोखिमों ने इसे गंभीर बना दिया है. रुपये की विनिमय दर 21 नवंबर से 28 नवंबर के बीच यूरो (102.32 से 103.63), ब्रिटिश पाउंड (116.08 से 118.27) और जापानी येन (0.5642 से 0.5720) के मुकाबले भी कमजोर हुई है. यानि रुपया सभी चार प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले गिर गया है.

सवाल – पिछले करीब 30-35 सालों में रुपए की क्या स्थिति रही है, हाल की गिरावट क्यों इतनी तेज है?

1991 में एक अमेरिकी डॉलर 17.50 भारतीय रुपए के बराबर था. ये 2020 तक 75 रुपए के आसपास पहुंचा. 3 दिसंबर 2025 के दिन ये 90.29 तक गिर गया, जो साल भर में 5-6% की गिरावट को दिखाता है. वर्ष 2025 में रुपए डॉलर की तुलना में 85 से 90 रुपए पर पहुंच गया है. ये सालभर में पांच रुपए की बड़ी गिरावट है.

सवाल – अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी का रुपए पर क्या असर पड़ रहा है?

– अमेरिका ने 2025 में भारत पर 50% टैरिफ लगाया – 25% पारस्परिक यानि रेसिप्रोकल और 25% रूसी तेल खरीदने की सजा के रूप में. जिससे भारत के टैक्सटाइल, जूते और आभूषण अमेरिका में महंगे हो गए. भारत इन चीजों को अमेरिका को सबसे ज्यादा निर्यात करता रहा है, क्योंकि वहां इनका बड़ा बाजार है. अब भारतीय सामानों का वहां कंपटीशन में टिकना मुश्किल हो रहा है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बारे में उम्मीद थी कि ये नवंबर के आखिर तक हो जाएगा, लेकिन इसके अब तक नहीं होने भारत – अमेरिका व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है, निवेशक सतर्क हो गए. अक्टूबर 2025 तक व्यापार घाटा $41.7 बिलियन तक पहुंच गया.

सवाल – वित्तीय निवेशकों का पैसा निकालना भी कैसे रुपए को कमजोर कर रहा है?

– विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकाल रहे हैं. इस साल $17 बिलियन से ज्यादा की रकम निकाली जा चुकी है. जब वित्तीय निवेशक यानि FII भारतीय संपत्तियां बेचते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है, जो रुपए पर दबाव डालती है. विदेशी निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से पैसा निकाल कर अमेरिकी बाजारों में लगा रहे हैं, जहां ब्याज दरें ऊंची हैं.

सवाल – आयात और निर्यात असंतुलन रुपए की गिरावट में कैसे योगदान दे रहा है?

– भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है—अक्टूबर 2025 में $41.7 बिलियन. तेल, सोना, चांदी, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स आयात ज्यादा महंगा हो गया. वहीं निर्यात टैरिफ से प्रभावित हुए. आयात के लिए ज्यादा डॉलर चाहिए, लेकिन निर्यात से कम डॉलर मिल रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया गिरता है.

सवाल – रुपए की गिरावट से क्या असर पड़ेगा?

– आयात महंगा हो जाएगा. विदेश यात्राएं, विदेश में शिक्षा और चिकित्सा महंगी हो जाएगी. मुद्रास्फीति बढ़ेगी. तेज गिरावट अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है.

सवाल – क्या सभी मुद्राएं डॉलर के मुकाबले गिर रही हैं या केवल रुपए पर ज्यादा असर है?

– नहीं, बिल्कुल नहीं. कई प्रमुख और उभरती मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई हैं यानि उनकी तुलना में डॉलर कमजोर पड़ा है, लेकिन भारतीय मुद्रा कमजोर हुई . स्वीडिश क्रोन 9% मजबूत हुआ तो यूरो 10.92% ऊपर चढ़ा. यहां तक कि चीनी युआन तक स्थिर है या हल्का मजबूत हुई.

सवाल – जब रुपया गिरता है तो रिजर्व बैंक इसको कैसे संभालता है, इस बार ये क्यों मुश्किल?

– RBI का मुख्य फोकस मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकना है, ऐसे मौकों पर वो अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता है ताकि डॉलर की आपूर्ति बढ़े और रुपया स्थिर हो. दिसंबर 2025 की शुरुआत में RBI ने 90 स्तर को पार करने से रोकने के लिए $30 बिलियन डॉलर जून से अक्टूबर तक बेचे.
वो डॉलर-रुपया स्वैप से लिक्विडिटी मैनेज करता है. ओपन मार्केट ऑपरेशंस से बांड खरीद-बिक्री कर बाजार को समर्थन देता है. दिसंबर 2025 में RBI ने $2 ट्रिलियन लिक्विडिटी इंजेक्ट करने की योजना बनाई है. लेकिन इस बात तेज गिरावट रिजर्व बैंक का काम मुश्किल बना रही है.

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