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Agency:News18 Madhya Pradesh
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Wheat Farming Tips : छतरपुर जिले में एक ऐसी फसल की खेती भी होती है, जिसमें पानी लगा देने से पूरी फसल में रोग लग जाता है. दरअसल, इसे कटिया गेहूं कहा जाता है. फसल में पानी लगाने पर रंगा नाम का रोग लग जाता है. इसम…और पढ़ें
कटिया गेहूं फसल
हाइलाइट्स
- कटिया गेहूं में पानी देने से रोग लग जाता है।
- कटिया गेहूं के लिए काली मिट्टी उपयुक्त होती है।
- कटिया गेहूं में रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती।
छतरपुर. जिले में एक ऐसी फसल की खेती भी होती है, जिसमें पानी लगा देने से इस फसल में रोग लग जाता है. दरअसल, कटिया गेहूं की इस फसल में पानी लगाने पर रंगा नाम का रोग लग जाता है. इस रोग में पौधों की बालियां काली पड़ जाती हैं.
किसान अशोक पाल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि कटिया गेहूं की खेती सालों से करते आए हैं. पहले बाबा करते थे, फिर पिता जी करने लगे, इसके बाद मैं पिछले 4 सालों से कर ही रहा हूं.
3 महीने में तैयार हो जाती है फसल
किसान बताते हैं कि कटिया गेहूं की बुवाई सामान्यता हर साल अक्टूबर- नवंबर माह में होती है. इस फसल को तैयार होने में लगभग 3 महीने का समय लगता है. हालांकि, कई बार 3 महीने से ज्यादा समय लग जाता है.
बगैर पानी होती है फसल तैयार
किसान बताते हैं कि कटिया गेहूं फसल में पानी देने की जरूरत नहीं होती है. भगवान ने ऊपर का पानी दे दिया तो ठीक है नहीं तो कोई जरूरत नहीं है. इस फसल के लिए किसान सिर्फ खेत अच्छे से तैयार कर ले. खेत तैयार करने से मतलब है जैसे जुताई-बुवाई अच्छे से हो जाए,खेत में कचड़ा न रहे.
मिट्टी में ही होता है तैयार
किसान बताते हैं कि कटिया गेहूं के लिए काली मिट्टी उपयुक्त होती है. ये फ़सल काली मिट्टी में ही पैदा होती है. क्योंकि ये मिट्टी पानी को संरक्षित करके रखती है. इस मिट्टी में शीत बना रहता है. कटिया गेहूं में किसी भी तरह की रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती है. किसान गोबर खाद ही डालकर बुवाई कर देते हैं. गोबर खाद भी नहीं डालते हैं तो भी फ़सल हो जाती है.
पानी देने से लग जाता है रोग
किसान बताते हैं कि अगर इस गेहूं की फ़सल में सिंचाई का पानी लगा दिया तो इसमें रंगा नाम का रोग लग जाता है. जिससे पौधे की बालियां काली पड़ जाती हैं. उसमें दाना नहीं पड़ता है. नीचे से उगस जाता है. दाना आ भी गया तो पतला हो जाता है.
Chhatarpur,Madhya Pradesh
February 11, 2025, 09:22 IST
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