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IND VS AUS : अच्छी गेंदबाजी के बाद क्या रेड्डी को बल्लेबाजी में मिलेगा प्रमोशन, क्या खेमेबाजी का शिकार हैं नितिश ?

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सिडनी. आमतौर पर जब आप किसी भी क्षेत्र में अच्छा काम करते हैं तो आपको प्रमोशन मिलता है .. तरक़्क़ी होती है और आपका ग्रेड उपर जाता है पर ये सब तभी होता है जब आपकी अपने बॉस से अच्छी बनती हो . और बॉस या अपने अधिकारी से आपकी नहीं बनती तो प्रमोशन छोड़िए आपके काम को भी नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. अगर आपके जिम्मे दो दो काम है तो किसी एक में खराब काम भी बॉस को हजम नहीं होता. दो शून्य के बाद नितिश रेड्डी ने दो विकेट लिए है पर क्या ये टीम का बॉस देख पाया होगा.

.ये बात क्रिकेट खेल में भी लागू होती है पर यहाँ भी बॉसगिरी है . दिक़्क़त तो ये है कि टीम में फ़िलहाल दो -दो बॉस हैं और किसको खुश रखा जाए इस बात को लेकर कंफ्यूजन है और डर भी . जिस खेमें में गए दूसरी खेमा आपके पीछे पड़ जाएगा कुछ ऐसी ही हालत ऑस्ट्रेलिया दौरे की खोज कहे जा रहे नितिश रेड्डी की है . रन बनाने के बाद भी ना तो बैटिंग आर्डर में प्रमोशन मिला और ना ही कोच और कप्तान का ध्यान उनके प्रदर्शन पर गया . नतीजा जिस नंबर पर रेड्डी ने ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी शुरु की थी वहीं आज भी क़ायम है. रेड्डी मेलबर्न में शतक बनाने के बाद भले ही अगली दोनों पारियों में शून्य पर आउट हो गए फिर भी तमाम एकस्पर्ट्स उनको पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते देखना चाहते है.

रेड्डी के प्रमोशन पर एक्सपर्ट्स की सुनों

शतक के बाद भले ही रेड्डी पहले मेलबर्न की दूसरी पारी और सिडनी की पहली पारी में शून्य पर आउट हुए हो पर तमाम क्रिकेट जानकार मानते हैं कि नितिश के पास वे तकनीक है जिसके दमपर वो नंबर पांच पर बल्लेबाजी कर सकते है .यशस्वी के कोच ज्वाला सिंह ने कहा कि नितिश रेड्डी के पास गेंद को लेट खेलने की छमता है और उनका बॉल सेंस लाजवाब है इसलिए उनको बैटिंग आर्डर में प्रमोशन मिलना चाहिए . ज्वाला सिंह ने ये भी कहा कि नंबर पांच पर पूरी सीरीज में पंच फेल रहे तो क्यों ना सीरीज़ की आख़िरी पारी में नितिश रेड्डी को नंबर पाँच पर खिलाया जाए. वरिष्ठ पत्रकार अयाज़ मेमन का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में रन बनाने के लिए टेंपरामेंट का होना बहुत ज़रूरी है जो नितिश रेड्डी के पास है जो इन्होनें इस दौरे पर दिखाया है . क्रीज़ पर डटकर बल्लेबाज़ी करने की क़ाबिलियत और विपरीत परिस्थितियों में रन बनाना ये साबित करता है कि उनको प्रमोशन देकर एक बार देखना चाहिए .पर सवाल ये है कि जो बाहर के लोगों को दिख रहा है वो टीम के अंदर काम करने वाले लोगों को क्यों नहीं दिख रहा . अब तो डर इस बात का है कि दो बार शून्य पर आउट होने वाले नितिश रेड्डी के प्रमोशन के बजाए डिमोशन ना दे दें .

पर्थ शुरु हुआ था  रेड्डी का पराक्रम

पर्थ टेस्ट की दूसरी पारी और ब्रिसबेन टेस्ट की इकलौती पारी को छोड़ दिया जाए तो अब तक दौरे पर खेली गयी छह पारियों में से चौथी बार रेड्डी ही टीम के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे हैं. पर्थ की पहली पारी में नितिश ने सबसे ज़्यादा 41 रन बनाए वहीं ऐडीलेड की दोनों पारियों में 42-42 रन बनाए . मेलबर्न में पहली पारी शतक आया जो उस मैच का सबसे बड़ा स्कोर था पर अगली दो इनिंग रेड्डी शून्य पर आउट हुए . रेड्डी ने 5 मैच में 294 रन बनाए हैं . उम्मीद की जा रही है कि रेड्डी के प्रमोशन मिलेगा और  सिडनी की दूसरी पारी में वो अपनी छाप छोड़ने में कामयाब जरूर होगें .

Tags: Border Gavaskar Trophy, India vs Australia, Jasprit Bumrah, Nitish Kumar Reddy, Sydney Test

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