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Untold Story About ‘Mera Naam Jokar’: आज हम आपको एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आज ही के दिन यानी 18 दिसंबर को साल 1970 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. यह एक ऐसी फिल्म थी जो फ्लॉप होकर भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. अब आप सोच रहे होंगे कि अगर कोई फिल्म फ्लॉप हो चुकी है तो भला वो फिर से ब्लॉकबस्टर कैसे हो सकती है? तो आज हम आपको बताएंगे कि कैसे ‘मेरा नाम जोकर’ के साथ ऐसा ही हुआ. कैसे इस फिल्म से राज कपूर कर्ज में डूब गए थे?

नई दिल्ली. आज से 55 साल पहले सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों ने पूरी तरह से नकार दिया था. यह रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी. इस फिल्म के फ्लॉप होते ही राज कपूर कर्ज में डूबते चले गए थे. इता ही नहीं, उन्हें अपने घर से लकर अपने स्टूडियो तक को गिरवी रखना पड़ा था. विकिपीडिया के अनुसार, राज कपूर को भारी नुकसान हुआ था.

दरअसल, ‘मेरा नाम जोकर’ एक एपिक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी, जिसे राज कपूर ने अपने बैनर आरके फिल्म्स के तहत डायरेक्ट, एडिट और प्रोड्यूस किया था और इसकी कहानी ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखी थी. फिल्म में राज कपूर ने मुख्य किरदार निभाया था और उनके बेटे ऋषि कपूर ने उनके बचपन का किरदार निभाकर स्क्रीन पर डेब्यू किया था.

साथ ही, सिमी गरेवाल, केसेनिया रियाबिंकिना, पद्मिनी, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, धर्मेंद्र और दारा सिंह सहायक भूमिकाओं में थे. कहानी एक जोकर पर आधारित थी, जिसे अपने दुखों की कीमत पर अपने दर्शकों को हंसाना होता था. तीन औरतें जिन्होंने उसकी जिंदगी को आकार दिया, वे उसका आखिरी परफॉर्मेंस देखती हैं.
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यह फिल्म इंडियन सिनेमा की सबसे लंबी फिल्मों में से एक थी. यह दूसरी और अब तक की आखिरी इंडियन फिल्म है जिसमें दो इंटरवल थे, पहली फिल्म संगम थी, जो 1964 में रिलीज हुई थी. ‘संगम’ के ब्लॉकबस्टर होने के बाद, ‘मेरा नाम जोकर’ का बहुत इंतजार किया जा रहा था, क्योंकि यह छह साल से बन रही थी और इसका जोरदार प्रचार भी किया गया था.

बता दें, यह फिल्म आंशिक रूप से सोवियत अभिनेताओं की भागीदारी से बनी थी और इसका कुछ हिस्सा मॉस्को में शूट किया गया था. फिल्म का संगीत, जो आज भी बहुत लोकप्रिय है, शंकर जयकिशन ने कंपोज किया था, जिसके लिए इस जोड़ी को अपना नौवां फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. भारत में रिलीज होने पर यह फिल्म क्रिटिकल और कमर्शियल तौर पर फ्लॉप रही, जिससे राज कपूर आर्थिक संकट में आ गए, क्योंकि फिल्म की लंबाई और कहानी के लिए इसकी आलोचना हुई थी.

इस फिल्म को बनाने में राज कपूर को 1 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे और बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने महज 80 लाख रुपये की कमाई ही कर पाई थी, जिसके बाद राज कपूर कर्ज डूब गए थे और इसलिए उन्होंने इस फिल्म के राइट्स सोवियत संघ को बेच दिया था. उसके बाद यह फिल्म जब सोवियत में रिलीज हुई तो वहां के बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया.

सोवियत संघ में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर बनकर उभरी और 16 करोड़ 80 लाख रुपये की कमाई की. बाद में यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक बन गई और इसे राज कपूर की बेहतरीन फिल्मों में से एक और 20वीं सदी की सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड फिल्मों में गिना जाता है. अब इस फिल्म को राज कपूर के बेहतरीन कामों में से एक माना जाता है.
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