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नई रिसर्च में वैज्ञानिकों को इस बात के साफ सबूत मिले हैं कि मैग्डालेनियन युग में 18 हजार साल पहले इंसान के समुदाय नरभक्षण करते थे,. यह भी पता चला है कि वे इंसानों का मस्तिष्क भी खा जाते थे. ये रोचक सबूत पोलैंड …और पढ़ें
प्रमाणों से साबित हुआ है कि उस दौर में नरमांस का भक्षण बड़े स्तर पर होता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हाइलाइट्स
- मैग्डालेनियन युग में 18 हजार साल पहले नरभक्षण होता था
- पोलैंड की माज़ीचा गुफा में मिले नरभक्षण के प्रमाण
- शोध में इंसानों का मस्तिष्क खाने के सबूत मिले
मानव इतिहास में ऐसे बहुत ही कम समूह जनजातियां रही हैं जो इंसान को ही मार कर खा जाती थी. यानी वे नरमांस भक्षण करती थीं. मान्यता है कि आज भी दुनिया के कुछ बहुत ही पुरानी जनजातियां जिनका आधुनिक मानव से कभी संपर्क नहीं हुए नरमांस भक्षण करती हैं. इतिहास में ऐसी मिसाल बहुत ही कम है. पर नई रिसर्च में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने ऐसे प्रमाण हासिल किए हैं जो बताते हैं कि 18 हजार साल पहले मैग्डालेनियन युग में मानव समुदाय नरभक्षण करते थे. यहां तक कि वे इंसानों का मस्तिष्क तक खा जाते थे.
पहले ठीक से पता नहीं इस बारे में
रिसर्च में उस दौर के शवगृहों और अनुष्ठान प्रथाओं की अहम जानकारी भी मिली. उत्तरी पुरापाषाण यूरोप के दौर में इंसान शिकारी थे और खाना जमा करते थे. लेकिन वे मरते कैसे थे, यह ठीक से पता नहीं था. कुछ ऐसे प्रमाण जरूर मिले जिससे कुछ अंदाजा हुआ कि मैग्डालेनियन अंतिम संस्कार गतिविधियां और प्रथाएं कैसे काम करती थीं.
प्रमाण साफ बताते हैं कि खास तरह से पोषण के लिए इंसानों के मांस को खाया जाता था. (तस्वीर: Instagram)
हड्डियों के निशानों की उलझन
फिर भी शवों से गायब हड्डियां कई तरह की संभावनाएं बताती थीं. पर साफ पता नहीं चल पा रहा था. लग रहा था कि लोग कुछ शरीर के कुछ हिस्से खास कारण से चुन कर अलग कर लिए जाते थे. यह भी पता है कि मैग्डालेनियन इंसानी हड्डियों का उपयोग गहनों, खोपड़ियों को कप की तरह इस्तेमाल करते थे. पर खास तरह के निशान शोधकर्ताओं की उलझन बढ़ा रहे थे.
नई रिसर्च का नरभक्षण की ओर इशारा
यह बहस होती रही कि क्या हड्डियों पर कटने के निशान हड्डियों की सफाई से बने या फिर खाने का मांस तैयार करने कोशिश में बने थे. शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पोलैंड में माज़ीचा गुफा में स्थित मानव हड्डियों का विश्लेषण में ऐसे प्रामाणिक संकेत मिले जो नरभक्षण की ओर साफ इशारा कर रहे थे.
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फिर दूर हुआ संदेह
पहले दलील दी गई इनमें दांतों के निशान नहीं है इसलिए नरभक्षण नहीं हो सकता. नए अध्ययन में आंकडों का फिर से अध्ययन कर नए प्रमाण जोड़े गए. पाया गया कि उस समय लोग इंसान का मस्तिष्क तक खा जाते थे. इसमें भी कोशिश खास पोषक हिस्सों को खाने की हुआ करती थी.
साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह भी नतीजा निकाला कि उस समय आबादी बढ़ने और उसमें विस्तार होने से भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा होती थी. इससे संघर्ष बढ़ा और आखिर युद्ध नरभक्षण की परम्पराएं शुरू होने लगीं. या तो लोग अपने ही मृतकों को खाते थे या फिर वे दुश्मनों के शव खा जाया करते थे.
February 10, 2025, 09:31 IST
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