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मलेशिया की एक युवा मां लाई यी की कहानी इन दिनों चर्चा में है. लाई यी एक सिंगल मदर हैं. बेहतर आमदनी और अपने बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने एक नौकरी के सिलसिले में अपने तब तीन साल के बेटे को साथ लेकर दक्षिण कोरिया जाने का फैसला किया. वहां पर जीवन बिताना काफी मुश्किल था. महिला को अपने बेटे को अकेले घर छोड़कर नौकरी पर जाना पड़ता था.
3 साल के बच्चे को अकेले घर छोड़कर जाती थी मां. (फोटो: Sin Chew Daily/ Facebook)शादी के बाद हर कपल चाहता है कि उनके बच्चे हों और वो अपनी फैमिली को आगे बढ़ाएं. मगर बच्चे होने के बाद औरतों के लिए लाइफ को मैनेज करना काफी कठिन हो जाता है. अगर औरत वर्किंग है, यानी नौकरी करती है, तो कई परिस्थितियों में उसे नौकरी छोड़नी पड़ती है और अगर वो ऐसा नहीं करती और सास-ससुर भी साथ नहीं रहते तो उसे बच्चे की देखभाल के लिए किसी को घर पर रखना पड़ता है. भारत में भी ये आम चलन हो चुका है. पर हाल ही में एक विदेशी मां के तौर तरीकों ने सभी को हैरान कर दिया. वो अपने 3 साल के बेटे को घर पर अेकाला छोड़कर नौकरी पर जाती है. उसकी देखभाल के लिए उसने किसी बाई को भी नहीं रखा है. बल्कि वो सीसीटीवी पर बच्चे की निगरानी करती है.
‘द इंडिपेंडेंट सिंगापुर’ की रिपोर्ट के मुताबिक मलेशिया की एक युवा मां लाई यी की कहानी इन दिनों चर्चा में है. लाई यी एक सिंगल मदर हैं. बेहतर आमदनी और अपने बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने एक नौकरी के सिलसिले में अपने तब तीन साल के बेटे को साथ लेकर दक्षिण कोरिया जाने का फैसला किया. आर्थिक ज़रूरतें और बेहतर जीवन की उम्मीद उन्हें इस फैसले तक ले आईं, लेकिन यह रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था. कोरिया पहुंचने के बाद लाई यी को अपने बेटे की देखभाल के लिए एक नैनी मिल गई, जो हफ्ते के दिनों में बच्चे का ख्याल रखती थी. समस्या तब खड़ी हुई जब पता चला कि नैनी वीकेंड पर काम नहीं करती, जबकि लाई यी की नौकरी में शनिवार को भी काम करना ज़रूरी था.
3 साल के बच्चे को अकेले छोड़कर नौकरी पर जाती थी मां
दक्षिण कोरिया में हर कंपनी कर्मचारियों को अपने बच्चों को दफ्तर लाने की अनुमति नहीं देती. लाई यी के पास भी ऐसा कोई विकल्प नहीं था. न कोई रिश्तेदार, न कोई भरोसेमंद सहारा. ऐसे में उन्हें एक बेहद कठिन और भावनात्मक फैसला लेना पड़ा. उन्होंने मलेशिया के अखबार शिन च्यू डेली को बताया, “जब कोई दूसरा रास्ता नहीं होता, तो ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, चाहे वे कितने ही दर्दनाक क्यों न हों.” मजबूरी में लाई यी को कुछ दिनों के लिए अपने तीन साल के बेटे को घर पर अकेला छोड़कर काम पर जाना पड़ा. यह फैसला उनके लिए अंदर से तोड़ देने वाला था. खुद लाई यी मानती हैं कि कोई भी मां या पिता अपनी मर्जी से इतने छोटे बच्चे को सुबह से शाम तक अकेला नहीं छोड़ना चाहेगा लेकिन परिस्थितियां ऐसी थीं कि उन्हें ये काम करना पड़ा.
मां ने घर में लगवा दिया सीसीटीवी कैमरा
लाई यी के दिमाग में तब एक विचार आया. उन्होंने घर में CCTV कैमरे लगवाए, जिनके जरिए वह काम पर रहते हुए भी अपने बेटे पर लगातार नज़र रखती थीं. लंच ब्रेक के दौरान वह वीडियो कॉल के जरिए बेटे के साथ खाना खाती थीं, उससे बात करती थीं और उसे यह एहसास दिलाने की कोशिश करती थीं कि मां भले पास न हो, लेकिन साथ है. यह ‘रिमोट पैरेंटिंग’ उनके लिए भावनात्मक रूप से थकाने वाली थी, लेकिन इसी से उन्हें थोड़ी तसल्ली भी मिलती थी. लाई यी बताती हैं कि इस पूरे संघर्ष में उनका बेटा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. इतनी कम उम्र में भी बच्चा कम ही रोता था और उसने हालात के साथ खुद को ढालना सीख लिया था. मां के अनुसार, उनका बेटा तीन साल की उम्र से ही आत्मनिर्भर बनना सीख गया था, जो कई लोगों के लिए यकीन करना मुश्किल था. बच्चे को सुरक्षित और सहज महसूस कराने के लिए लाई यी रोज़ काम पर जाने से पहले उसके लिए खाना तैयार करके रखती थीं. समय के साथ हालात बदले. सालों की मेहनत, संघर्ष और धैर्य के बाद मां-बेटे की जिंदगी में स्थिरता आई. आज लाई यी का बेटा छह साल का हो चुका है. अब हालात पहले से कहीं बेहतर हैं और लाई यी की सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि वह उस वक्त की भरपाई कर सकें, जो मजबूरी में वह अपने बेटे को नहीं दे पाईं.
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आशुतोष अस्थाना न्यूज़18 हिन्दी वेबसाइट के ऑफबीट सेक्शन चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. यहां वो दुनिया की अजीबोगरीब खबरें, अनोखे फैक्ट्स और सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग न्यूज़ को कवर करते हैं. आशुतोष को डिजिटल मी…और पढ़ें
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